भारतीय वेब सीरीज के इतिहास के पन्नों को जब भी पलटा जाएगा तो एक किरदार हमेशा सबसे सुनहरे अक्षरों में चमकता हुआ दिखाई देगा और वो है श्रीकांत तिवारी। यह सिर्फ एक खुफिया जासूस की कहानी नहीं है बल्कि एक ऐसे मध्यवर्गीय इंसान की गाथा है जो पूरी दुनिया बचाने के साथ-साथ अपनी टूटती हुई शादी को बचाने की जद्दोजहद भी कर रहा है।
राज एंड डीके द्वारा रचित ‘द फैमिली मैन‘ ने भारतीय दर्शकों को एक ऐसा अनूठा जेम्स बॉन्ड दिया जो विदेशी जासूसों की तरह महंगे सूट-बूट की जगह आम सूती शर्ट पहनता है। वह मुंबई की भीड़भाड़ वाली लोकल ट्रेन में धक्के खाता है और इसी मास्टरपीस किरदार की सबसे बड़ी खूबी इसका वो बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग है।
इस खूबी ने एक डार्क जासूसी थ्रिलर सीरीज को भारतीय दर्शकों के दिलों की धड़कन बना दिया। लेकिन क्या आप इस बात से वाकिफ हैं कि स्क्रीन पर आपको हंसा-हंसा कर लोटपोट कर देने वाले कई सीन्स कभी कागज पर लिखी स्क्रिप्ट का हिस्सा थे ही नहीं।
इस विशेष लेख में हम राज एंड डीके के मास्टरक्लास के उन अनसुने किस्सों के जरिए मनोज बाजपेयी की उस अद्भुत कलाकारी का गहराई से विश्लेषण करेंगे। आप जानेंगे कि कैसे एक मंझे हुए अभिनेता ने कैमरे के सामने अपने किरदार की आत्मा को इस कदर अपना लिया कि कई ऐतिहासिक कॉमिक सीन्स सेट पर ही उपज गए।
यह सफर सिर्फ एक सीरीज की मेकिंग का नहीं बल्कि अभिनय के उस जादुई तरीके का है जो पर्दे पर असल जिंदगी का आईना बन जाता है। इन सीन्स ने श्रीकांत तिवारी के किरदार को हमेशा के लिए अमर बना दिया और दर्शकों के जहन में एक अमिट छाप छोड़ी है।
एक आम आदमी जो बन गया भारतीय ओटीटी का सबसे बड़ा और चहेता जासूस
जब भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने अपने पैर पसारने शुरू किए थे तब ज्यादातर सीरीज डार्क क्राइम और गालियों से भरी हुई एक जैसी कहानियां पेश कर रही थीं। दर्शकों को एक ऐसी ताजगी की तलाश थी जो उन्हें बांध कर भी रखे और उनकी अपनी जिंदगी से जुड़ी हुई भी लगे।
राज एंड डीके ने इसी खालीपन को समझा और एक ऐसे किरदार की रचना की जो पेशे से तो नेशनल इंटेलिजेंस एजेंसी का एक बड़ा अफसर है। लेकिन घर में उसकी हैसियत एक आम पति और पिता से ज्यादा कुछ नहीं है और यह विरोधाभास ही ‘द फैमिली मैन’ की सबसे बड़ी ताकत बन गया।
मनोज बाजपेयी ने जब इस किरदार को सुना तो वह तुरंत समझ गए कि यह कोई आम भूमिका नहीं है बल्कि भारत के हर उस आदमी की कहानी है। यह उस इंसान की कहानी है जो अपनी नौकरी और परिवार के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में रोज पिसता है।
श्रीकांत तिवारी को ईएमआई की चिंता सताती है और उसे बच्चों की स्कूल फीस भी भरनी होती है जबकि अगले ही पल वह देश को दहलाने वाले आतंकवादियों से लोहा ले रहा होता है। इसी आम आदमी वाले पहलू ने किरदार में उस हास्य को जन्म दिया जो किसी भी कॉमेडी शो से ज्यादा असरदार था।
स्क्रिप्ट की बंदिशों से बाहर जाकर जब मनोज बाजपेयी ने किया सेट पर असली जादू
अभिनय की दुनिया में इम्प्रोवाइजेशन यानी मौके पर ही संवाद गढ़ लेना कोई आसान काम नहीं होता और इसके लिए किरदार के मनोविज्ञान की गहरी समझ होनी जरूरी है। राज एंड डीके ने अपने एक मास्टरक्लास में इस बात का खुलासा किया था कि उन्होंने अभिनेताओं को हमेशा एक खुला मैदान दिया।
उन्होंने यह आज़ादी इसलिए दी ताकि वे अपने किरदार के साथ खेल सकें और मनोज बाजपेयी जैसे दिग्गज अभिनेता के लिए यह छूट किसी वरदान से कम नहीं थी। वे डायलॉग्स को सिर्फ रटते नहीं बल्कि उन्हें गहराई से महसूस करके अपने खास अंदाज में बोलते हैं।
श्रीकांत तिवारी की चाल और उसके बात करने का लहजा या फिर मुश्किल वक्त में उसका व्यंग्य कसना यह सब स्क्रिप्ट से ज्यादा मनोज बाजपेयी के भीतर से आ रहा था। निर्देशक जोड़ी का कहना था कि कई बार कैमरा रोल होने के बाद मनोज कुछ ऐसा कर जाते थे जो स्क्रिप्ट में नहीं होता था।
वह प्रदर्शन इतना बेहतरीन होता था कि उसे फाइनल कट में रखना ही पड़ता था और उनका यह स्वाभाविक अभिनय ही वह वजह है जिससे श्रीकांत तिवारी का किरदार कभी भी बनावटी नहीं लगता। यह किरदार हर पल एक असली इंसान की तरह पर्दे पर सांस लेता हुआ महसूस होता है।
जेके और श्रीकांत की वो लाजवाब केमेस्ट्री जो कागजों पर नहीं बल्कि सेट पर लिखी गई थी
श्रीकांत तिवारी और उनके सहयोगी जेके तलपड़े यानी शारिब हाशमी की जोड़ी को अगर भारतीय ओटीटी का जय और वीरू कहा जाए तो यह बिल्कुल भी गलत नहीं होगा। इन दोनों के बीच के जो हल्के-फुल्के पल हैं वो दरअसल एक बहुत ही तनावपूर्ण जासूसी दुनिया के बीच ताजी हवा के झोंके की तरह काम करते हैं।
शारिब हाशमी ने कई साक्षात्कारों में यह बात मानी है कि उनके और मनोज के बीच कई मजेदार संवाद सिर्फ एक्शन और कट के बीच की उपज थे। जब दोनों मिशन पर निकलते हुए वड़ा पाव खाते हैं या फिर किसी संदिग्ध का पीछा करते हुए अपनी पारिवारिक उलझनों पर चर्चा करते हैं।
यह चर्चा अभिनय नहीं बल्कि दो सहकर्मियों की असल बातचीत लगती है क्योंकि मनोज बाजपेयी अपने अनुभव से यह जानते थे कि जेके के हर सीधे सवाल का जवाब कैसा होना चाहिए। वे बखूबी समझते थे कि श्रीकांत का झुंझलाहट भरा जवाब किस तरह से दर्शकों को गुदगुदाएगा।
सेट पर दोनों की यह जुगलबंदी इतनी स्वाभाविक हो गई थी कि राज एंड डीके कई बार बिना रोके कैमरे को चलने देते थे ताकि वो असली जादू कैद कर सकें। यह अनफिल्टर्ड अभिनय ही दोनों किरदारों की दोस्ती को पर्दे पर इतना गहरा और प्रामाणिक बनाता है।
चेम्बूर का जेम्स बॉन्ड और उसके परिवार के साथ होने वाले वो अनकहे और मजेदार डायलॉग्स
सीरीज में श्रीकांत तिवारी के परिवार के साथ वाले दृश्य सबसे ज्यादा गुदगुदाने वाले और दिल को छू लेने वाले माने जाते हैं। पत्नी सुची से सिगरेट पीने की बात छुपाना हो या फिर अपने बेटे अथर्व के अजीबोगरीब सवालों के जवाब देना हो इन सभी सीन्स में एक अलग ही जादू है।
इन दृश्यों में मनोज बाजपेयी ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों को भी जोड़ा है और बच्चों की स्कूल प्रिंसिपल के साथ श्रीकांत का वो सीन बहुत ही शानदार है। जहां वह अपने गुस्से को काबू करने की कोशिश करता है और प्रिंसिपल उसे धैर्य रखना सिखाती है वह कॉमेडी का एक बेहतरीन उदाहरण है।
मनोज बाजपेयी के चेहरे के वो सूक्ष्म भाव और उनकी वह झूठी मुस्कान जो अंदर के गुस्से को दबाए रखती है वह किसी लेखक की कलम से नहीं आ सकती। यह केवल एक बेहतरीन अभिनेता के तजुर्बे से ही आ सकती है जिसने जीवन को बहुत करीब से देखा हो।
इसी तरह जब श्रीकांत अपनी बेटी धृति के बॉयफ्रेंड को डराने की कोशिश करता है तो वहां जासूस और पिता का जो अद्भुत मिश्रण दिखाई देता है वह कमाल का है। इसने दर्शकों को हंसने पर पूरी तरह से मजबूर कर दिया था और ये सभी छोटी-छोटी बातें ही एक आम सीरीज को क्लासिक का दर्जा दिलाती हैं।
राज एंड डीके मास्टरक्लास के वो अनसुने किस्से जो हर सिनेमा प्रेमी को जानने चाहिए
सिनेमा और वेब सीरीज के छात्रों के लिए राज एंड डीके का मास्टरक्लास किसी खजाने से कम नहीं है जहां उन्होंने अपनी निर्माण प्रक्रिया के कई राज खोले हैं। उनका मानना है कि थ्रिलर में कॉमेडी डालना हमेशा दोधारी तलवार पर चलने जैसा होता है।
अगर चुटकुला गलत जगह आ जाए तो दृश्य का सारा तनाव खत्म हो सकता है लेकिन उनका भरोसा अपने मुख्य अभिनेता पर इतना ज्यादा था। उन्होंने कॉमेडी का सारा जिम्मा श्रीकांत तिवारी के स्वाभाविक व्यवहार और मनोज बाजपेयी की समझ पर छोड़ दिया।
निर्देशकों ने बताया कि उन्होंने संवादों का सिर्फ एक ढांचा तैयार किया था लेकिन उसमें रंग भरने का काम मनोज बाजपेयी ने अपनी गजब की कॉमिक टाइमिंग से किया। जब श्रीकांत तिवारी किसी गंभीर मीटिंग के बीच में कुछ ऐसा बोल देता है जो माहौल को हल्का कर दे।
वह महज एक डायलॉग नहीं बल्कि उस किरदार का अपना सुरक्षा तंत्र होता है और इसी मास्टरक्लास से यह भी पता चला कि कैसे कुछ सीन्स को दोबारा शूट नहीं किया गया। क्योंकि मनोज का पहला इम्प्रोवाइज्ड टेक ही सबसे ज्यादा सच्चा और असरदार था जिसे पर्दे पर रखना जरूरी था।
सेट पर अपनी हँसी रोकने की वो भारी चुनौती जो वहां मौजूद हर इंसान ने झेली
जब कैमरे के सामने कोई अभिनेता अपने किरदार में डूबकर कुछ अप्रत्याशित करता है तो पीछे खड़े क्रू मेंबर्स के लिए अपनी हंसी रोक पाना सबसे मुश्किल काम बन जाता है। ‘द फैमिली मैन’ के सेट से भी कई ऐसे ही मजेदार किस्से जुड़े हुए हैं जो हमेशा याद किए जाते हैं।
जब मनोज बाजपेयी के अचानक बोले गए किसी चुटकुले या हाव-भाव पर पूरा क्रू ठहाके लगाकर हंस पड़ा था तो माहौल बदल जाता था। शारिब हाशमी ने बताया था कि कई बार उन्हें खुद अपना मुंह घुमाकर अपनी हंसी छुपानी पड़ती थी ताकि सीन खराब ना हो जाए।
एक गंभीर विषय पर बन रही सीरीज के सेट का माहौल इस तरह के हल्के-फुल्के पलों की वजह से काफी खुशनुमा बना रहता था। मनोज बाजपेयी की यह खासियत है कि वे कितनी भी गहराई वाले किरदार में हों लेकिन वे अपने सह-कलाकारों को हमेशा सहज महसूस कराते हैं।
इसी सहजता के कारण कई ऐसे सीन्स निखर कर सामने आए जिन्हें देखकर आज भी दर्शक अपनी हंसी नहीं रोक पाते हैं। इन दृश्यों की स्वाभाविकता ही दर्शकों को बार-बार यह सीरीज देखने पर मजबूर कर देती है।
श्रीकांत तिवारी के किरदार से जुड़ी वो कुछ बेहद खास बातें जो उनके फैंस को जरूर जाननी चाहिए
एक कालजयी किरदार हमेशा अपने साथ कई ऐसे राज समेटे रहता है जो उसे और भी ज्यादा दिलचस्प और रहस्यमयी बनाते हैं। ‘द फैमिली मैन’ और श्रीकांत तिवारी के बनने की प्रक्रिया भी ऐसी ही कई छोटी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण बातों से भरी हुई है।
ये बातें दर्शकों को हमेशा हैरान करती हैं और उनके मन में किरदार के प्रति और ज्यादा प्यार भर देती हैं। आइए ऐसे ही कुछ खास तथ्यों पर एक नजर डालते हैं जो इस किरदार की गहराई को और बेहतर तरीके से समझने में हमारी मदद करेंगे।
- मनोज बाजपेयी ने श्रीकांत तिवारी की शारीरिक भाषा और चाल-ढाल को मुंबई के उन आम लोगों से प्रेरित होकर गढ़ा था जो हर दिन लोकल ट्रेन में सफर करते हैं।
- सीरीज में श्रीकांत के कई व्यंग्यात्मक वन-लाइनर्स स्क्रिप्ट में लिखे ही नहीं गए थे बल्कि वे सीधे मनोज के ही दिमाग की तुरंत उपज थे जो कैमरे के सामने निकले।
- चेल्लम सर के साथ वाले दृश्यों में भी दोनों अभिनेताओं के बीच कई संवाद मौके की नजाकत को देखकर ही सेट पर अचानक से बदले गए थे।
- श्रीकांत का बार-बार सिगरेट को सूंघना और उसे छुपाने की कोशिश करना एक ऐसी आदत थी जिसे मनोज ने खुद किरदार में एक कॉमिक एलिमेंट के तौर पर जोड़ा था।
- हॉस्पिटल वाले उस मशहूर सीन में जहां श्रीकांत और जेके बैठे हैं वहां का भारी तनाव कम करने के लिए किया गया मजाक पूरी तरह से अनियोजित था।
एक भारतीय अभिनेता का वो लंबा सफर जिसने वेब सीरीज की पूरी दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया
मनोज बाजपेयी उन चंद अभिनेताओं में से एक हैं जिन्होंने न सिर्फ भारतीय सिनेमा में समानांतर फिल्मों को मुख्यधारा में लाया बल्कि डिजिटल दुनिया में भी अपना डंका बजाया। ओटीटी के दौर में उन्होंने अपना एक अलग और मजबूत परचम लहराया है जो सबसे अलग है।
‘द फैमिली मैन’ से पहले वेब सीरीज की दुनिया में मुख्य किरदारों को ज्यादातर हिंसक या बहुत ही डार्क रूप में दिखाया जाता था लेकिन श्रीकांत तिवारी ने इस धारणा को तोड़ दिया। उन्होंने यह साबित कर दिया कि एक थ्रिलर सीरीज का हीरो भी अपनी कमजोरियों के साथ दिल जीत सकता है।
वह अपने मजाकिया अंदाज के साथ दर्शकों का चहेता बन सकता है और इस सीरीज की अपार सफलता के बाद भारतीय लेखकों का नजरिया भी काफी हद तक बदल गया। निर्देशकों ने किरदारों में कॉमेडी का तड़का लगाना शुरू कर दिया जो कहानी को और भी वास्तविक बनाता है।
मनोज बाजपेयी के इस एक किरदार ने अभिनय की एक नई पाठशाला खोल दी है जहां यह सिखाया जाता है कि आपको हीरो बनने के लिए परफेक्ट होने की जरूरत नहीं है। श्रीकांत तिवारी की खामियां ही उसकी खूबी हैं और यही बात उसे डिजिटल दुनिया का सबसे प्यारा जासूस बनाती है।
जब तक भारतीय ओटीटी और डिजिटल सिनेमा रहेगा तब तक श्रीकांत तिवारी का यह नाम अमर रहेगा
समय के साथ कई वेब सीरीज आती हैं और पुरानी पड़कर भुला दी जाती हैं लेकिन कुछ चुनिंदा किरदार दर्शकों के मन में हमेशा के लिए अपना घर बना लेते हैं। श्रीकांत तिवारी सिर्फ एक सीजन या दो सीजन का कोई मामूली आकर्षण नहीं है।
बल्कि वह एक ऐसा कल्ट बन चुका है जिसके मीम्स और डायलॉग्स रोजमर्रा की जिंदगी और सोशल मीडिया का अहम हिस्सा बन गए हैं। राज एंड डीके की यह दूरदर्शी सोच और मनोज बाजपेयी का वह जादुई इम्प्रोवाइजेशन एक अमर कला बन चुके हैं।
इन दोनों के तालमेल से एक ऐसी कला का निर्माण हुआ है जिसे आने वाली पीढ़ियों तक हमेशा याद रखा जाएगा और सराहा जाएगा। श्रीकांत का वो सूखी हंसी हंसना और अपनी पारिवारिक समस्याओं के बीच देश के दुश्मनों को धूल चटाना हमें बहुत कुछ सिखाता है।
यह किरदार सिखाता है कि असली हीरो वही है जो हर मुश्किल का सामना मुस्कुराते हुए करे और कभी हार ना माने। जब भी एक संपूर्ण और मनोरंजक सीरीज की बात होगी तो ‘द फैमिली मैन’ का नाम हमेशा सबसे ऊपर लिया जाएगा।
इसके केंद्र में हमेशा खड़ा रहेगा हमारा अपना चेम्बूर का जेम्स बॉन्ड श्रीकांत तिवारी जो दिलों पर राज करता है। यह एक ऐसी अमर विरासत है जो अभिनय की किताबों में एक शानदार अध्याय के रूप में हमेशा के लिए दर्ज रहेगी।
लेकिन क्या आप इस बात से वाकिफ हैं कि स्क्रीन पर आपको हंसा-हंसा कर लोटपोट कर देने वाले कई सीन्स कभी कागज पर लिखी स्क्रिप्ट का हिस्सा थे ही नहीं। इस विशेष लेख में हम राज एंड डीके के मास्टरक्लास के उन अनसुने किस्सों के जरिए मनोज बाजपेयी की उस अद्भुत कलाकारी का गहराई से विश्लेषण करेंगे जिसने श्रीकांत तिवारी के किरदार को हमेशा के लिए अमर बना दिया। आप जानेंगे कि कैसे एक मंझे हुए अभिनेता ने कैमरे के सामने अपने किरदार की आत्मा को इस कदर अपना लिया कि कई ऐतिहासिक कॉमिक सीन्स सेट पर ही स्वाभाविक रूप से उपज गए। यह सफर सिर्फ एक सीरीज की मेकिंग का नहीं बल्कि अभिनय के उस जादुई तरीके का है जो पर्दे पर असल जिंदगी का आईना बन जाता है।
एक आम आदमी जो बन गया भारतीय ओटीटी का सबसे बड़ा और चहेता जासूस
जब भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने अपने पैर पसारने शुरू किए थे तब ज्यादातर सीरीज डार्क क्राइम और गालियों से भरी हुई एक जैसी कहानियां पेश कर रही थीं। दर्शकों को एक ऐसी ताजगी की तलाश थी जो उन्हें बांध कर भी रखे और उनकी अपनी जिंदगी से जुड़ी हुई भी लगे। राज एंड डीके ने इसी खालीपन को समझा और एक ऐसे किरदार की रचना की जो पेशे से तो नेशनल इंटेलिजेंस एजेंसी का एक बड़ा अफसर है लेकिन घर में उसकी हैसियत एक आम पति और पिता से ज्यादा कुछ नहीं है। यह विरोधाभास ही ‘द फैमिली मैन’ की सबसे बड़ी ताकत और आत्मा बन गया।
मनोज बाजपेयी ने जब इस किरदार को सुना तो वह तुरंत समझ गए कि यह कोई आम भूमिका नहीं है बल्कि भारत के हर उस आदमी की कहानी है जो अपनी नौकरी और परिवार के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में रोज पिसता है। श्रीकांत तिवारी को ईएमआई की चिंता सताती है और उसे बच्चों की स्कूल फीस भी भरनी होती है जबकि अगले ही पल वह देश को दहलाने वाले आतंकवादियों से लोहा ले रहा होता है। इसी आम आदमी वाले पहलू ने किरदार में उस हास्य को जन्म दिया जो किसी भी कॉमेडी शो से ज्यादा असरदार और सच्चा था।
स्क्रिप्ट की बंदिशों से बाहर जाकर जब मनोज बाजपेयी ने किया सेट पर असली जादू
अभिनय की दुनिया में इम्प्रोवाइजेशन यानी मौके पर ही संवाद गढ़ लेना कोई आसान काम नहीं होता और इसके लिए किरदार के मनोविज्ञान की गहरी समझ होनी जरूरी है। राज एंड डीके ने अपने एक मास्टरक्लास में इस बात का खुलासा किया था कि उन्होंने अभिनेताओं को हमेशा एक खुला मैदान दिया जहां वे अपने किरदार के साथ खेल सकें। मनोज बाजपेयी जैसे दिग्गज अभिनेता के लिए यह आज़ादी किसी वरदान से कम नहीं थी क्योंकि वे डायलॉग्स को सिर्फ रटते नहीं बल्कि उन्हें महसूस करके अपने अंदाज में बोलते हैं।
श्रीकांत तिवारी की चाल और उसके बात करने का लहजा या फिर मुश्किल वक्त में उसका व्यंग्य कसना यह सब स्क्रिप्ट से ज्यादा मनोज बाजपेयी के भीतर से आ रहा था। निर्देशक जोड़ी का कहना था कि कई बार कैमरा रोल होने के बाद मनोज कुछ ऐसा कर जाते थे जो स्क्रिप्ट में नहीं होता था लेकिन वह इतना बेहतरीन होता था कि उसे फाइनल कट में रखना ही पड़ता था। उनका यह स्वाभाविक अभिनय ही वह वजह है जिससे श्रीकांत तिवारी का किरदार कभी भी बनावटी या नकली महसूस नहीं होता।
जेके और श्रीकांत की वो लाजवाब केमेस्ट्री जो कागजों पर नहीं बल्कि सेट पर लिखी गई थी
श्रीकांत तिवारी और उनके सहयोगी जेके तलपड़े यानी शारिब हाशमी की जोड़ी को अगर भारतीय ओटीटी का जय और वीरू कहा जाए तो यह बिल्कुल भी गलत नहीं होगा। इन दोनों के बीच के जो हल्के-फुल्के पल हैं वो दरअसल एक बहुत ही तनावपूर्ण जासूसी दुनिया के बीच ताजी हवा के झोंके की तरह काम करते हैं। शारिब हाशमी ने कई साक्षात्कारों में यह बात मानी है कि उनके और मनोज के बीच कई मजेदार संवाद सिर्फ एक्शन और कट के बीच की उपज थे।
जब दोनों मिशन पर निकलते हुए वड़ा पाव खाते हैं या फिर किसी संदिग्ध का पीछा करते हुए अपनी पारिवारिक उलझनों पर चर्चा करते हैं तो वह अभिनय नहीं बल्कि दो सहकर्मियों की असल बातचीत लगती है। मनोज बाजपेयी अपने अनुभव से यह जानते थे कि जेके के हर सीधे सवाल पर श्रीकांत का झुंझलाहट भरा जवाब कैसा होना चाहिए। सेट पर दोनों की यह जुगलबंदी इतनी स्वाभाविक हो गई थी कि राज एंड डीके कई बार बिना रोके कैमरे को चलने देते थे ताकि वो असली जादू कैद कर सकें।
चेम्बूर का जेम्स बॉन्ड और उसके परिवार के साथ होने वाले वो अनकहे और मजेदार डायलॉग्स
सीरीज में श्रीकांत तिवारी के परिवार के साथ वाले दृश्य सबसे ज्यादा गुदगुदाने वाले और दिल को छू लेने वाले माने जाते हैं। पत्नी सुची से सिगरेट पीने की बात छुपाना हो या फिर अपने बेटे अथर्व के अजीबोगरीब सवालों के जवाब देना हो इन सभी सीन्स में मनोज बाजपेयी ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों को भी जोड़ा है। बच्चों की स्कूल प्रिंसिपल के साथ श्रीकांत का वो सीन जहां वह अपने गुस्से को काबू करने की कोशिश करता है और प्रिंसिपल उसे धैर्य रखना सिखाती है वह कॉमेडी का एक बहुत ही शानदार उदाहरण है।
मनोज बाजपेयी के चेहरे के वो सूक्ष्म भाव और उनकी वह झूठी मुस्कान जो अंदर के गुस्से को दबाए रखती है वह किसी लेखक की कलम से नहीं बल्कि एक बेहतरीन अभिनेता के तजुर्बे से ही आ सकती है। इसी तरह जब श्रीकांत अपनी बेटी धृति के बॉयफ्रेंड को डराने की कोशिश करता है तो वहां जासूस और पिता का जो अद्भुत मिश्रण दिखाई देता है उसने दर्शकों को हंसने पर पूरी तरह से मजबूर कर दिया था। ये सभी छोटी-छोटी बातें ही हैं जो एक आम सीरीज को क्लासिक का दर्जा दिलाती हैं।
राज एंड डीके मास्टरक्लास के वो अनसुने किस्से जो हर सिनेमा प्रेमी को जानने चाहिए
सिनेमा और वेब सीरीज के छात्रों के लिए राज एंड डीके का मास्टरक्लास किसी खजाने से कम नहीं है जहां उन्होंने अपनी निर्माण प्रक्रिया के कई राज खोले हैं। उनका मानना है कि थ्रिलर में कॉमेडी डालना हमेशा दोधारी तलवार पर चलने जैसा होता है क्योंकि अगर चुटकुला गलत जगह आ जाए तो दृश्य का सारा तनाव खत्म हो सकता है। लेकिन उनका भरोसा अपने मुख्य अभिनेता पर इतना ज्यादा था कि उन्होंने कॉमेडी का सारा जिम्मा श्रीकांत तिवारी के स्वाभाविक व्यवहार पर छोड़ दिया।
निर्देशकों ने बताया कि उन्होंने संवादों का सिर्फ एक ढांचा तैयार किया था लेकिन उसमें रंग भरने का काम मनोज बाजपेयी ने अपनी गजब की कॉमिक टाइमिंग से किया। जब श्रीकांत तिवारी किसी गंभीर मीटिंग के बीच में कुछ ऐसा बोल देता है जो माहौल को हल्का कर दे तो वह महज एक डायलॉग नहीं बल्कि उस किरदार का अपना सुरक्षा तंत्र होता है। इसी मास्टरक्लास से यह भी पता चला कि कैसे कुछ सीन्स को सिर्फ इसलिए दोबारा शूट नहीं किया गया क्योंकि मनोज का पहला इम्प्रोवाइज्ड टेक ही सबसे ज्यादा सच्चा और असरदार था।
सेट पर अपनी हँसी रोकने की वो भारी चुनौती जो वहां मौजूद हर इंसान ने झेली
जब कैमरे के सामने कोई अभिनेता अपने किरदार में डूबकर कुछ अप्रत्याशित करता है तो पीछे खड़े क्रू मेंबर्स के लिए अपनी हंसी रोक पाना सबसे मुश्किल काम बन जाता है। ‘द फैमिली मैन’ के सेट से भी कई ऐसे ही मजेदार किस्से जुड़े हुए हैं जब मनोज बाजपेयी के अचानक बोले गए किसी चुटकुले या हाव-भाव पर पूरा क्रू ठहाके लगाकर हंस पड़ा था। शारिब हाशमी ने बताया था कि कई बार उन्हें खुद अपना मुंह घुमाकर अपनी हंसी छुपानी पड़ती थी ताकि सीन खराब ना हो जाए।
एक गंभीर विषय पर बन रही सीरीज के सेट का माहौल इस तरह के हल्के-फुल्के पलों की वजह से काफी खुशनुमा बना रहता था। मनोज बाजपेयी की यह खासियत है कि वे कितनी भी गहराई वाले किरदार में हों लेकिन वे अपने सह-कलाकारों को हमेशा सहज महसूस कराते हैं। इसी सहजता के कारण कई ऐसे सीन्स निखर कर सामने आए जिन्हें देखकर आज भी दर्शक अपनी हंसी नहीं रोक पाते हैं और बार-बार सीरीज देखने पर मजबूर हो जाते हैं।
श्रीकांत तिवारी के किरदार से जुड़ी वो कुछ बेहद खास बातें जो उनके फैंस को जरूर जाननी चाहिए
एक कालजयी किरदार हमेशा अपने साथ कई ऐसे राज समेटे रहता है जो उसे और भी ज्यादा दिलचस्प और रहस्यमयी बनाते हैं। ‘द फैमिली मैन’ और श्रीकांत तिवारी के बनने की प्रक्रिया भी ऐसी ही कई छोटी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण बातों से भरी हुई है जो दर्शकों को हमेशा हैरान करती हैं। आइए ऐसे ही कुछ खास तथ्यों पर एक नजर डालते हैं जो इस किरदार की गहराई को और बेहतर तरीके से समझने में हमारी मदद करेंगे।
- मनोज बाजपेयी ने श्रीकांत तिवारी की शारीरिक भाषा और चाल-ढाल को मुंबई के उन आम लोगों से प्रेरित होकर गढ़ा था जो हर दिन लोकल ट्रेन में सफर करते हैं।
- सीरीज में श्रीकांत के कई व्यंग्यात्मक वन-लाइनर्स स्क्रिप्ट में लिखे ही नहीं गए थे बल्कि वे सीधे मनोज के ही दिमाग की तुरंत उपज थे।
- चेल्लम सर के साथ वाले दृश्यों में भी दोनों अभिनेताओं के बीच कई संवाद मौके की नजाकत को देखकर ही सेट पर बदले गए थे।
- श्रीकांत का बार-बार सिगरेट को सूंघना और उसे छुपाने की कोशिश करना एक ऐसी आदत थी जिसे मनोज ने खुद किरदार में एक कॉमिक एलिमेंट के तौर पर जोड़ा था।
- हॉस्पिटल वाले उस मशहूर सीन में जहां श्रीकांत और जेके बैठे हैं वहां का तनाव कम करने के लिए किया गया मजाक पूरी तरह से अनियोजित था।
एक भारतीय अभिनेता का वो लंबा सफर जिसने वेब सीरीज की पूरी दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया
मनोज बाजपेयी उन चंद अभिनेताओं में से एक हैं जिन्होंने न सिर्फ भारतीय सिनेमा में समानांतर फिल्मों को मुख्यधारा में लाया बल्कि ओटीटी के दौर में भी अपना एक अलग और मजबूत परचम लहराया है। ‘द फैमिली मैन’ से पहले वेब सीरीज की दुनिया में मुख्य किरदारों को ज्यादातर हिंसक या बहुत ही डार्क रूप में दिखाया जाता था लेकिन श्रीकांत तिवारी ने इस धारणा को पूरी तरह से तोड़ दिया। उन्होंने यह साबित कर दिया कि एक थ्रिलर सीरीज का हीरो भी अपनी कमजोरियों और मजाकिया अंदाज के साथ दर्शकों का दिल जीत सकता है।
इस सीरीज की अपार सफलता के बाद भारतीय लेखकों और निर्देशकों का नजरिया भी काफी हद तक बदल गया और उन्होंने किरदारों में कॉमेडी का तड़का लगाना शुरू कर दिया। मनोज बाजपेयी के इस एक किरदार ने अभिनय की एक नई पाठशाला खोल दी है जहां यह सिखाया जाता है कि आपको हीरो बनने के लिए हमेशा परफेक्ट होने की जरूरत नहीं है। श्रीकांत तिवारी की खामियां ही उसकी सबसे बड़ी खूबी हैं और यही बात उसे डिजिटल दुनिया का सबसे यथार्थवादी और प्यारा जासूस बनाती है।
जब तक भारतीय ओटीटी और डिजिटल सिनेमा रहेगा तब तक श्रीकांत तिवारी का यह नाम अमर रहेगा
समय के साथ कई वेब सीरीज आती हैं और पुरानी पड़कर भुला दी जाती हैं लेकिन कुछ चुनिंदा किरदार दर्शकों के मन में हमेशा के लिए अपना घर बना लेते हैं। श्रीकांत तिवारी सिर्फ एक सीजन या दो सीजन का आकर्षण नहीं है बल्कि वह एक ऐसा कल्ट बन चुका है जिसके मीम्स और डायलॉग्स रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं। राज एंड डीके की यह दूरदर्शी सोच और मनोज बाजपेयी का वह जादुई इम्प्रोवाइजेशन मिलकर एक ऐसी कला का निर्माण कर गए हैं जिसे पीढ़ियों तक याद रखा जाएगा।
श्रीकांत का वो सूखी हंसी हंसना और अपनी पारिवारिक समस्याओं के बीच देश के दुश्मनों को धूल चटाना हमें यह सिखाता है कि असली हीरो वही है जो हर मुश्किल का सामना मुस्कुराते हुए करे। जब भी एक संपूर्ण और मनोरंजक सीरीज की बात होगी तो ‘द फैमिली मैन’ का नाम सबसे ऊपर लिया जाएगा और इसके केंद्र में हमेशा खड़ा रहेगा हमारा अपना चेम्बूर का जेम्स बॉन्ड श्रीकांत तिवारी। यह एक ऐसी अमर विरासत है जो अभिनय की किताबों में एक शानदार अध्याय के रूप में हमेशा दर्ज रहेगी।








