साल 1997 की बात है जब बॉलीवुड की गलियों में एक युवा और घबराया हुआ लड़का अपनी पहली फिल्म की स्क्रिप्ट लेकर भटक रहा था। इस लड़के का नाम करण जौहर था जिनके कंधों पर अपने पिता यश जौहर के प्रोडक्शन हाउस धर्मा प्रोडक्शंस को एक नई दिशा देने की भारी जिम्मेदारी थी। शाहरुख खान और काजोल जैसे बड़े सितारे पहले ही इस फिल्म का हिस्सा बन चुके थे। लेकिन इस रोमांटिक कहानी के दो सबसे अहम किरदार टीना और अमन अभी भी अधूरे थे। ये वो दौर था जब बॉलीवुड का कोई भी बड़ा सितारा दूसरे लीड रोल में नजर नहीं आना चाहता था। करण जौहर इंडस्ट्री की हर बड़ी एक्ट्रेस और हर उभरते हुए हीरो के वैनिटी वैन के चक्कर काट रहे थे। उन्हें बार-बार सिर्फ एक ही शब्द सुनने को मिल रहा था और वह शब्द था ‘ना’।
यह कहानी सिर्फ एक ब्लॉकबस्टर फिल्म के बनने की नहीं है बल्कि यह रिजेक्शन, डर और उस जादुई किस्मत की कहानी है जिसने भारतीय सिनेमा को हमेशा के लिए बदल दिया। इस लेख में हम गहराई से जानेंगे कि कैसे वो किरदार जिन्हें आधी इंडस्ट्री ने ठुकरा दिया था वही किरदार रानी मुखर्जी और सलमान खान के पास पहुंचे। हम समझेंगे कि कैसे कैमरे के पीछे की इस उठापटक ने ‘कुछ कुछ होता है’ को सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक कल्ट क्लासिक बना दिया।
नब्बे के दशक का वह दौर और एक युवा निर्देशक की सबसे बड़ी चुनौती
नब्बे का दशक भारतीय सिनेमा में रोमांस का सुनहरा दौर माना जाता है। यश चोपड़ा और सूरज बड़जात्या की फिल्मों ने प्यार की नई परिभाषाएं गढ़ दी थीं। ऐसे में एक 25 साल का लड़का जो आदित्य चोपड़ा के साथ ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ में बतौर असिस्टेंट काम कर चुका था वह अपनी खुद की एक दुनिया बनाना चाहता था। करण जौहर की कहानी एक कॉलेज रोमांस पर आधारित थी जिसमें दोस्ती, प्यार और बिछड़ने का दर्द शामिल था।
राहुल और अंजलि के रूप में शाहरुख और काजोल की जोड़ी तो पहले ही सुपरहिट साबित हो चुकी थी। इसलिए इन दोनों को साइन करने में करण को कोई परेशानी नहीं हुई। असली चुनौती कहानी के दूसरे हिस्से में थी। करण को एक ऐसी लड़की की तलाश थी जो लंदन से वापस आई हो जो बेहद खूबसूरत हो और जिसे देखते ही राहुल को प्यार हो जाए। दूसरी तरफ उन्हें एक ऐसे लड़के की जरूरत थी जो अंजलि का मंगेतर हो और जिसकी पर्सनैलिटी इतनी दमदार हो कि वह शाहरुख खान के सामने भी फीका न पड़े।
टीना मल्होत्रा की तलाश जब एक के बाद एक टूटते गए उम्मीदों के धागे
करण जौहर ने टीना का किरदार अपनी बचपन की दोस्त ट्विंकल खन्ना को ध्यान में रखकर लिखा था। दिलचस्प बात यह है कि इस किरदार का नाम भी उन्होंने अपनी इसी दोस्त के निकनेम पर रखा था। करण को पूरा यकीन था कि ट्विंकल इस रोल के लिए तुरंत हां कर देंगी। लेकिन जब ट्विंकल ने स्क्रिप्ट पढ़ी तो उन्हें लगा कि इस फिल्म में शाहरुख और काजोल का पलड़ा बहुत भारी है। उन्हें डर था कि कहीं वह पूरी फिल्म में महज एक साइड एक्ट्रेस बनकर न रह जाएं। ग्यारह दिन तक स्क्रिप्ट अपने पास रखने के बाद ट्विंकल ने इस रोल को करने से साफ इनकार कर दिया।
ट्विंकल के इनकार के बाद करण का संघर्ष और ज्यादा बढ़ गया। उन्होंने उस वक्त की लगभग हर टॉप एक्ट्रेस का दरवाजा खटखटाया। उर्मिला मातोंडकर, ऐश्वर्या राय और करिश्मा कपूर जैसी कई बड़ी अभिनेत्रियों को यह रोल ऑफर किया गया। लेकिन हर किसी ने वही कारण बताया जो ट्विंकल ने बताया था। कोई भी एक्ट्रेस उस वक्त काजोल के सामने सपोर्टिंग रोल नहीं करना चाहती थी। एक समय ऐसा भी आया जब करण जौहर पूरी तरह से निराश हो गए थे। उन्होंने मजाक में यहां तक कह दिया था कि अगर कोई एक्ट्रेस नहीं मिली तो वह खुद शॉर्ट स्कर्ट पहनकर टीना का रोल कर लेंगे।
खंडाला गर्ल की एंट्री और रातों-रात किस्मत का बदलना
निराशा के उसी दौर में करण जौहर की मुलाकात शाहरुख खान और आदित्य चोपड़ा से हुई। आदित्य चोपड़ा ने करण को सलाह दी कि वह रानी मुखर्जी नाम की एक नई लड़की से मिलें। रानी की फिल्म ‘राजा की आएगी बारात’ का प्रोमो आदित्य देख चुके थे और उन्हें रानी की आंखों में एक गजब की चमक नजर आई थी। करण बिना कोई समय बर्बाद किए रानी मुखर्जी के घर पहुंच गए। रानी उस वक्त बहुत छोटी और इंडस्ट्री में बिल्कुल नई थीं।
करण ने रानी को स्क्रिप्ट सुनाई और साफ-साफ बता दिया कि यह रोल बहुत छोटा है लेकिन कहानी का सबसे अहम हिस्सा है। रानी की आत्मविश्वास से भरी मुस्कान ने करण का दिल जीत लिया। रानी ने तुरंत इस फिल्म के लिए हां कर दी। मनीष मल्होत्रा को टीना के लिए ग्लैमरस कपड़े डिजाइन करने की जिम्मेदारी दी गई। जब रानी मुखर्जी सेट पर लाल रंग की वह आइकॉनिक ड्रेस पहनकर आईं तो हर किसी की आंखें खुली की खुली रह गईं। जो रोल सबके लिए रिजेक्टेड था उसी रोल ने रानी को रातों-रात बॉलीवुड की सबसे बड़ी स्टार बना दिया।
अमन मेहरा का संकट जब बॉलीवुड के हर बड़े हीरो ने कर दिया था इनकार
टीना का किरदार तो मिल गया लेकिन फिल्म के सेकंड हाफ के लिए अमन का किरदार अभी भी खाली था। यह एक ऐसा कैमियो था जो कहानी का पूरा क्लाइमैक्स तय करने वाला था। करण ने यह रोल सबसे पहले सैफ अली खान को ऑफर किया लेकिन सैफ ने इसके लिए मना कर दिया। उसके बाद यह रोल उस वक्त के मशहूर एक्टर चंद्रचूड़ सिंह के पास गया लेकिन उन्होंने भी इसे ठुकरा दिया।
करण जौहर के लिए यह किसी बुरे सपने से कम नहीं था। उनकी फिल्म की आधी शूटिंग खत्म होने वाली थी और कहानी का एक मुख्य किरदार अभी तक तय नहीं हुआ था। एक रात चंकी पांडे के घर पर बॉलीवुड सितारों की एक पार्टी चल रही थी। उस पार्टी में करण जौहर एक कोने में उदास बैठे थे। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि अब वह अपनी फिल्म कैसे पूरी करेंगे। तभी उनकी किस्मत का सबसे बड़ा चमत्कार हुआ।
पार्टी की वो रात जब सलमान खान बने करण जौहर के मसीहा
उसी पार्टी में बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान मौजूद थे। उन्होंने करण को उदास देखा और उनके पास जाकर परेशानी का कारण पूछा। करण ने अपनी पूरी कास्टिंग की समस्या सलमान को बताई और यह भी बताया कि कैसे हर कोई अमन के रोल को ठुकरा रहा है। सलमान ने पूरी बात बहुत शांति से सुनी। उस वक्त सलमान खान बहुत बड़े स्टार बन चुके थे और उनके पास फिल्मों की कोई कमी नहीं थी।
करण की बात सुनकर सलमान ने अपने खास और बेबाक अंदाज में कहा कि इस इंडस्ट्री में कोई भी बड़ा स्टार यह रोल नहीं करेगा लेकिन मैं तुम्हारे लिए यह फिल्म जरूर करूंगा। यह सुनकर करण जौहर हैरान रह गए। उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि सलमान खान जैसा बड़ा सुपरस्टार उनकी पहली फिल्म में एक सपोर्टिंग कैमियो करने के लिए तैयार हो गया है। सलमान ने यह फैसला करण के पिता यश जौहर के प्रति अपने गहरे सम्मान और अपने बड़े दिल के कारण लिया था।
सेट पर सलमान और रानी की पहली मुलाकात और कैमरे के पीछे का जादू
इस फिल्म की शूटिंग के दौरान कई ऐसे दिलचस्प वाकये हुए जो आज भी बॉलीवुड के गलियारों में मशहूर हैं। आइए कुछ खास बातों पर नजर डालते हैं जो इस फिल्म की कास्टिंग को और भी खास बनाती हैं
- रानी मुखर्जी की आवाज की चुनौती: रानी मुखर्जी की आवाज थोड़ी भारी थी और उस वक्त कई लोगों ने करण को सलाह दी थी कि वह रानी की आवाज को डब करवा लें। लेकिन करण ने अपनी हीरोइन की असली आवाज पर भरोसा रखा जो बाद में रानी की सबसे बड़ी यूएसपी बन गई।
- सूट और फटी जीन्स का किस्सा: ‘साजन जी घर आए’ गाने की शूटिंग के दौरान सलमान खान सूट नहीं पहनना चाहते थे। वह चाहते थे कि अमन एक फटी हुई जीन्स और टी-शर्ट में एंट्री ले। करण जौहर यह सुनकर रोने लगे थे जिसके बाद सलमान ने करण को हंसाते हुए सूट पहनने के लिए हामी भर दी थी।
- सेट पर पहली मुलाकात: सलमान खान और रानी मुखर्जी की पहली मुलाकात इसी फिल्म के सेट पर हुई थी। दोनों के बीच की केमिस्ट्री पर्दे पर इतनी शानदार दिखी कि दर्शकों ने इस जोड़ी को तुरंत अपना लिया।
- स्क्रीन प्रेजेंस का कमाल: सलमान खान फिल्म के सिर्फ आखिरी हिस्से में नजर आते हैं लेकिन उन्होंने अपने लिमिटेड स्क्रीन टाइम में भी पूरी फिल्म की महफिल लूट ली थी।
विवाद और चुनौतियां क्या सच में शाहरुख और काजोल के सामने टिक पाना आसान था
जब फिल्म रिलीज होने वाली थी तब इंडस्ट्री के कई लोगों को लग रहा था कि शाहरुख और काजोल की सुपरहिट जोड़ी के सामने रानी मुखर्जी और सलमान खान बिल्कुल दब जाएंगे। रानी के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती थी क्योंकि उन्हें उस काजोल के सामने स्क्रीन शेयर करनी थी जो पहले से ही एक बहुत बड़ी सुपरस्टार थीं। लेकिन जब फिल्म का पहला हाफ खत्म हुआ तो दर्शक टीना के किरदार के दीवाने हो चुके थे।
दूसरी ओर सलमान खान के लिए भी यह एक रिस्क था। क्लाइमैक्स में जब अमन अंजलि का हाथ राहुल के हाथों में देता है तो वह दृश्य बहुत ही भावुक था। सलमान ने अपने आंसुओं और अपनी खामोशी से उस दृश्य में जो जान फूंकी उसने उन्हें दर्शकों का चहेता बना दिया। बिना किसी अहंकार के दूसरे हीरो के लिए अपनी दुल्हन छोड़ देने वाला यह किरदार भारतीय सिनेमा के सबसे प्यारे किरदारों में से एक बन गया।
हिंदी सिनेमा पर इस मास्टरपीस कास्टिंग का सदाबहार असर
‘कुछ कुछ होता है’ 16 अक्टूबर 1998 को रिलीज हुई और इसने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया। इस फिल्म ने सिर्फ कमाई के रिकॉर्ड ही नहीं तोड़े बल्कि बॉलीवुड में कॉलेज रोमांस और फैशन का एक नया ट्रेंड सेट कर दिया। फिल्म का संगीत इसके डायलॉग्स और इसके किरदार हर युवा की जुबान पर थे।
इस फिल्म के बाद रानी मुखर्जी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और वह बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेसेस की लिस्ट में शामिल हो गईं। वहीं सलमान खान को अमन के किरदार के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का फिल्मफेयर अवार्ड मिला। इस फिल्म ने यह साबित कर दिया कि कोई भी रोल छोटा या बड़ा नहीं होता बल्कि उस रोल को निभाने वाले कलाकार की नीयत और उसकी मेहनत उसे बड़ा बनाती है। करण जौहर रातों-रात भारत के सबसे सफल निर्देशकों में से एक बन गए।
नियति का वो खेल जिसने रची इतिहास की सबसे खूबसूरत प्रेम कहानी
जब हम आज इतने सालों बाद इस फिल्म को मुड़कर देखते हैं तो हमें एहसास होता है कि सिनेमा में किस्मत और नियति का कितना बड़ा खेल होता है। अगर ट्विंकल खन्ना या उर्मिला मातोंडकर ने टीना का रोल स्वीकार कर लिया होता तो शायद हमें रानी मुखर्जी का वह चुलबुला अंदाज कभी देखने को नहीं मिलता। अगर सैफ अली खान अमन बन जाते तो शायद ‘साजन जी घर आए’ में सलमान खान वाली वह स्वैग और वह मासूमियत कभी पर्दे पर नहीं उतर पाती।
कभी-कभी रिजेक्शन किसी बहुत बड़ी और खूबसूरत चीज की शुरुआत होती है। ‘कुछ कुछ होता है’ की कास्टिंग इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि जो होता है वह अच्छे के लिए ही होता है। आज भी जब यह फिल्म टेलीविजन पर आती है तो दर्शक उसी उत्साह के साथ टीना और अमन को देखते हैं। इन किरदारों ने हमें सिखाया कि प्यार सिर्फ पाने का नाम नहीं है बल्कि प्यार दोस्ती है और कभी-कभी प्यार का मतलब किसी की खुशी के लिए खुद पीछे हट जाना भी होता है। करण जौहर की यह डूबती हुई नैया जिन दो सितारों ने बचाई थी उन्होंने इस नैया को सीधे इतिहास के सुनहरे पन्नों पर ले जाकर खड़ा कर दिया।
कुछ महत्वपूर्ण और अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
कुछ कुछ होता है में टीना के रोल के लिए करण जौहर की पहली पसंद कौन थी?
करण जौहर ने यह किरदार अपनी बचपन की दोस्त ट्विंकल खन्ना के लिए लिखा था लेकिन उन्होंने यह रोल करने से इनकार कर दिया था।
सलमान खान से पहले अमन का रोल किन अभिनेताओं को ऑफर किया गया था?
अमन का किरदार पहले सैफ अली खान और चंद्रचूड़ सिंह जैसे मशहूर अभिनेताओं को ऑफर किया गया था जिन्होंने इसे ठुकरा दिया था।
रानी मुखर्जी को इस फिल्म में कास्ट करने की सलाह करण जौहर को किसने दी थी?
मशहूर निर्देशक आदित्य चोपड़ा ने करण जौहर को रानी मुखर्जी को कास्ट करने की सलाह दी थी।
फिल्म के मशहूर गाने साजन जी घर आए में सलमान खान क्या पहनना चाहते थे?
सलमान खान इस गाने में सूट की जगह फटी हुई जीन्स और टी-शर्ट पहनना चाहते थे जिसे लेकर करण जौहर काफी परेशान हो गए थे।
क्या इस फिल्म के लिए सलमान खान और रानी मुखर्जी को कोई अवार्ड मिला था?
हां इस फिल्म में अपने शानदार अभिनय के लिए सलमान खान और रानी मुखर्जी दोनों को बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर और एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवार्ड मिला था।










