कल हो ना हो की वो अनकही कहानी जब करण जौहर और करीना कपूर की दोस्ती में आई थी दरार

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कल हो ना हो कास्टिंग विवाद

साल 2003 का वो जादुई दौर और एक ऐतिहासिक फिल्म की नींव

नब्बे के दशक के अंत और दो हजार के शुरुआती सालों में हिंदी सिनेमा एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा था। यह वह समय था जब कहानियां देश की सीमाओं को पार कर विदेशों में बसे भारतीयों के दिलों को छूने लगी थीं और रोमांस को एक नया आधुनिक रूप दिया जा रहा था। इसी सुनहरे दौर में एक ऐसी फिल्म की नींव रखी जा रही थी जिसने आने वाले कई सालों तक दर्शकों को हंसाया भी और रुलाया भी।

इस फिल्म में प्यार दोस्ती और जिंदगी की नश्वरता का ऐसा ताना बाना बुना गया था जिसे आज भी लोग भूल नहीं पाए हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पर्दे पर जो जादुई तिकड़ी आपको नजर आई वह इस फिल्म के निर्माताओं की पहली पसंद कभी थी ही नहीं। कैमरे के पीछे एक ऐसी कहानी चल रही थी जो किसी फिल्मी ड्रामे से कम नहीं थी और जिसके बारे में आम दर्शक उस समय पूरी तरह से अनजान थे।

यह कहानी है बॉलीवुड के मशहूर फिल्म निर्माता करण जौहर और बेबो यानी करीना कपूर के बीच हुए एक ऐसे विवाद की जिसने रातों-रात एक नई स्टार को जन्म दिया। इस लेख में हम करण जौहर की आत्मकथा एन अनसूटेबल बॉय के पन्नों से उस अनकहे किस्से को खंगालेंगे जब एक जिद ने सालों पुरानी दोस्ती को दांव पर लगा दिया था। हम जानेंगे कि कैसे नैना का वो आइकॉनिक किरदार करीना कपूर के हाथों से फिसलकर प्रीति जिंटा की झोली में जा गिरा और कैसे इस एक फैसले ने हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया।

नैना कैथरीन कपूर के किरदार का जन्म और करण की पहली पसंद

जब फिल्म कभी खुशी कभी गम ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए रिकॉर्ड बनाए तो करण जौहर के आत्मविश्वास को एक नई उड़ान मिली। इसी दौरान उनके दिमाग में न्यूयॉर्क की पृष्ठभूमि पर आधारित एक ऐसी कहानी आकार लेने लगी जिसमें एक चुलबुली लेकिन जिंदगी से निराश लड़की का किरदार सबसे अहम था। इस किरदार का नाम रखा गया नैना कैथरीन कपूर जो अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों के बोझ तले अपनी मुस्कान भूल चुकी थी और प्यार पर से उसका विश्वास उठ चुका था।

करण जौहर के लिए इस किरदार को पर्दे पर जीवंत करने के लिए एक ही नाम उनके जहन में था और वह नाम था करीना कपूर का। फिल्म कभी खुशी कभी गम में पू के किरदार में करीना ने जो ऊर्जा और नखरे दिखाए थे उसने करण को बेहद प्रभावित किया था। करण का मानना था कि करीना के अंदर वह गहराई और अभिनय क्षमता मौजूद है जो नैना के इस जटिल और भावुक किरदार को पूरी तरह से न्याय दे सकेगी।

उन दिनों करण और करीना की दोस्ती बॉलीवुड के गलियारों में चर्चा का विषय हुआ करती थी और दोनों एक दूसरे के बेहद करीब थे। करण ने जब इस फिल्म की रूपरेखा तैयार की तो उन्होंने बिना किसी झिझक के करीना को इस रोल के लिए अप्रोच किया और उन्हें पूरी कहानी विस्तार से सुनाई। उन्हें पूरा विश्वास था कि उनकी मुंहबोली बहन और खास दोस्त करीना इस प्रस्ताव को तुरंत स्वीकार कर लेंगी और दोनों मिलकर एक और बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्म देंगे।

पैसों की वो मांग जिसने करण और करीना की गहरी दोस्ती में दरार डाल दी

जब करण जौहर ने करीना कपूर के सामने फिल्म का प्रस्ताव रखा तो शुरुआत में सब कुछ बेहद सामान्य और सकारात्मक लग रहा था। कहानी सुनने के बाद करीना भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने के लिए काफी उत्साहित नजर आ रही थीं और रोल को लेकर कई तरह की रचनात्मक चर्चाएं भी शुरू हो गई थीं। लेकिन जैसे ही बात फिल्म के वित्तीय पहलुओं और फीस तक पहुंची तो अचानक से दोनों के बीच के हालात और समीकरण पूरी तरह से बदलने लगे।

करण जौहर ने अपनी मशहूर आत्मकथा एन अनसूटेबल बॉय में इस घटना का विस्तार से जिक्र करते हुए बताया है कि करीना कपूर ने उस समय शाहरुख खान के बराबर फीस की मांग कर दी थी। करीना का तर्क था कि फिल्म का एक बड़ा हिस्सा उनके किरदार नैना के इर्द गिर्द घूमता है इसलिए उन्हें फिल्म के मुख्य अभिनेता के समान ही पारिश्रमिक मिलना चाहिए। यह वो दौर था जब बॉलीवुड में अभिनेत्रियों के लिए समान वेतन पर इतनी खुलकर बात नहीं होती थी जितनी आज के आधुनिक दौर में होती है।

करीना की इस व्यावसायिक मांग ने करण जौहर को न सिर्फ हैरान किया बल्कि एक करीबी दोस्त के तौर पर उन्हें भीतर तक आहत भी कर दिया। करण को लगता था कि उनके और करीना के बीच का रिश्ता पैसों से कहीं बढ़कर है और एक दोस्त होने के नाते वह उनकी होम प्रोडक्शन फिल्म को लेकर इतनी कठोर नहीं होंगी। दूसरी तरफ करीना अपनी मार्केट वैल्यू और उस समय रिलीज के लिए तैयार अपनी फिल्म मुझसे दोस्ती करोगे को लेकर काफी आश्वस्त थीं और अपनी मांग पर पूरी तरह से अड़ी रहीं।

जब करण ने करीना को समझाने की कोशिश की और फिल्म के सीमित बजट की दुहाई दी तो बात बनने के बजाय और ज्यादा बिगड़ती चली गई। करण ने भारी मन से उन्हें सप्ताहांत तक का समय दिया ताकि वह अपने फैसले पर फिर से विचार कर सकें और एक व्यावहारिक नतीजे पर पहुंच सकें। लेकिन उस वीकेंड पर जो कुछ हुआ उसने बॉलीवुड की इस मशहूर और चकाचौंध से भरी दोस्ती की नींव को जड़ से हिला कर रख दिया।

खामोशी का वो लंबा दौर जब दोनों ने एक दूसरे से मुंह मोड़ लिया था

सोमवार की सुबह जब करण जौहर ने अंतिम जवाब जानने के लिए करीना कपूर को फोन किया तो दूसरी तरफ से कोई उत्तर नहीं मिला। करण ने कई बार कॉल किया लेकिन करीना ने न तो फोन उठाया और न ही कोई पलटकर जवाब दिया जो करण के लिए किसी गहरे सदमे से कम नहीं था। करण को लगा कि जिस इंसान को वह अपने परिवार का अभिन्न हिस्सा मानते थे उसने महज पैसों के लिए उनसे संवाद का हर रास्ता ही खत्म कर दिया।

यह खामोशी किसी आम झगड़े या मतभेद की तरह नहीं थी बल्कि यह एक ऐसे अहंकार का भारी टकराव था जिसने दोनों के बीच एक गहरी खाई पैदा कर दी थी। अपनी किताब में करण बड़े ही भावुक अंदाज में लिखते हैं कि इस वाकये के बाद लगभग नौ महीने तक उन दोनों के बीच किसी भी तरह की कोई सामान्य बातचीत नहीं हुई। दोनों एक ही फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा थे और कई बार एक ही छत के नीचे मौजूद होने के बावजूद एक दूसरे को पूरी तरह से नजरअंदाज करते रहे।

करण जौहर इस बात से सबसे ज्यादा दुखी थे कि जब वह करीना को बार बार फोन कर रहे थे तो उन्होंने कम से कम बात करके अपनी स्थिति स्पष्ट करने की भी जहमत नहीं उठाई। फिल्मी पार्टियों और बड़े इवेंट्स में दोनों एक दूसरे के सामने से ऐसे गुजर जाते थे जैसे उनके बीच कभी कोई जान पहचान या दोस्ती ही न रही हो। इस चुभती हुई खामोशी ने करण को यह कड़ा फैसला लेने पर मजबूर कर दिया कि अब वह नैना के किरदार के लिए किसी नई अभिनेत्री की तलाश शुरू करेंगे।

प्रीति जिंटा की वो ऐतिहासिक एंट्री जिसने रातों-रात बदल दी फिल्म की किस्मत

करीना कपूर के इस असहयोगी रवैये के बाद फिल्म का काम कुछ समय के लिए रुक सा गया था क्योंकि मुख्य अभिनेत्री का चुनाव फिर से सिरे से करना था। इसी बीच करण जौहर और फिल्म के निर्देशक निखिल आडवाणी ने बॉलीवुड की अन्य बेहतरीन अभिनेत्रियों के नामों पर गंभीरता से विचार करना शुरू किया जो इस किरदार के लिए उपयुक्त हो सकती थीं। तभी उनके जहन में एक ऐसा नाम आया जो अपनी बेबाक मुस्कान और नैसर्गिक अभिनय के लिए मशहूर था और वह खूबसूरत नाम था प्रीति जिंटा का।

प्रीति जिंटा उस समय बॉलीवुड में अपनी एक अलग और बेहद मजबूत पहचान बना चुकी थीं और दर्शकों के बीच उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही थी। करण ने बिना समय गंवाए प्रीति जिंटा से संपर्क किया और उन्हें इस फिल्म की पूरी कहानी सुनाई जिसे सुनकर प्रीति पहली ही बार में तुरंत तैयार हो गईं। प्रीति के लिए यह एक बहुत बड़ा मौका था क्योंकि शाहरुख खान के साथ एक बड़ी प्रोडक्शन फिल्म में लीड रोल निभाना उस दौर में किसी भी अभिनेत्री का सबसे बड़ा सपना होता था।

जैसे ही प्रीति जिंटा ने फिल्म के कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए फिल्म के सेट पर मानो एक नई और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो गया। प्रीति ने नैना के किरदार को इतनी शिद्दत और लगन से अपनाया कि कुछ ही दिनों में पूरी टीम को लगने लगा कि यह किरदार शायद बना ही सिर्फ उनके लिए था। उनकी वो खूबसूरत डिंपल वाली मुस्कान और आंखों के चौड़े चश्मे ने नैना को एक ऐसी नई पहचान दी जो आज भी भारतीय सिनेमा की सबसे यादगार छवियों में गिनी जाती है।

इस ऐतिहासिक कास्टिंग विवाद से जुड़े कुछ बेहद खास और अनसुने पहलू

इस पूरी नाटकीय घटना ने बॉलीवुड के काम करने के तरीके और कलाकारों के आपसी संबंधों को लेकर कई नई बातें सामने रखीं जिनके बारे में आम दर्शक कम ही जानते हैं। आइए इस मशहूर विवाद और कास्टिंग से जुड़े कुछ ऐसे अहम और अनसुने पहलुओं पर नजर डालते हैं जो इस कहानी को और भी ज्यादा दिलचस्प और यादगार बनाते हैं।

  • समान वेतन की वो शुरुआती और साहसिक बहस बॉलीवुड में आज अभिनेत्रियां समान वेतन के लिए खुलकर अपनी आवाज उठा रही हैं लेकिन करीना कपूर ने यह बड़ा कदम दो दशक पहले ही उठा लिया था। भले ही उस समय उन्हें इस बात का भारी नुकसान उठाना पड़ा और एक बड़ी फिल्म गंवानी पड़ी लेकिन उनका यह कदम अपने आप में बेहद साहसिक और समय से आगे की सोच वाला था।
  • शाहरुख खान का समझदारी भरा न्यूट्रल रुख इस पूरे गहरे विवाद के दौरान शाहरुख खान जो कि फिल्म के मुख्य अभिनेता और सह निर्माता थे उन्होंने पूरी तरह से तटस्थ रुख अपनाना ही बेहतर समझा। उन्होंने करण और करीना के निजी विवाद में दखल देने से खुद को दूर रखा और फिल्म की भलाई के लिए करण के हर फैसले का पूरा और खुला समर्थन किया।
  • किताब में खुलकर किया गया भावनाओं का इजहार करण जौहर ने अपनी किताब एन अनसूटेबल बॉय में इस घटना का जिक्र जिस ईमानदारी से किया है वह बॉलीवुड जैसे चमकते उद्योग में कम ही देखने को मिलता है। उन्होंने अपनी गलतियों अपने भयंकर गुस्से और अपने गहरे दुख को बिना किसी लाग लपेट के दुनिया के सामने रखा जिसने इस कहानी को हमेशा के लिए अमर कर दिया।
  • मुझसे दोस्ती करोगे का बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप होना दिलचस्प बात यह है कि करीना जिस फिल्म की रिलीज और सफलता को लेकर इतना ज्यादा आश्वस्त थीं वह बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से फ्लॉप साबित हो गई थी। इस अप्रत्याशित असफलता ने करीना को भी यह सोचने पर मजबूर कर दिया था कि शायद उन्होंने कल हो ना हो को ठुकरा कर अपने सुनहरे करियर की एक बहुत बड़ी गलती कर दी थी।
  • प्रीति जिंटा का बेबाक और पेशेवर अंदाज जब प्रीति को यह बात पता चली कि वह इस फिल्म के लिए निर्माताओं की पहली पसंद नहीं थीं तो उन्होंने इसे अपने ईगो पर नहीं लिया बल्कि एक सुनहरे अवसर के रूप में देखा। उन्होंने इस बात को कभी दुनिया से छिपाया भी नहीं और अपनी प्रतिभा के दम पर यह साबित कर दिया कि वह किसी की भी जगह लेने की पूरी और शानदार काबिलियत रखती हैं।

नैना के रूप में प्रीति जिंटा का वो जादू जो दर्शकों के सिर चढ़कर बोला

जब यह ऐतिहासिक फिल्म बड़े पर्दे पर रिलीज हुई तो दर्शकों ने प्रीति जिंटा को नैना के रूप में हाथों हाथ लिया और उनके शानदार अभिनय की जमकर तारीफ की। फिल्म के पहले हिस्से में एक सख्त और भावहीन लड़की से लेकर दूसरे हिस्से में एक प्रेमी और भावुक महिला तक का उनका अभिनय का सफर बेहद शानदार और स्वाभाविक था। शाहरुख खान के साथ उनकी रोमांटिक केमिस्ट्री और सैफ अली खान के साथ उनकी मजेदार नोकझोंक ने फिल्म को एक अलग ही स्तर पर पहुंचा दिया था।

कई मशहूर फिल्म समीक्षकों ने उस समय अपने लेखों में लिखा था कि प्रीति जिंटा की जगह किसी और अभिनेत्री को इस जटिल किरदार में सोच पाना भी अब नामुमकिन सा लगता है। उनका मॉर्डन लेकिन संस्कारी अंदाज और न्यूयॉर्क की तेज रफ्तार जिंदगी के साथ उनका बेहतरीन तालमेल फिल्म की असली जान बन गया था और दर्शकों को खुद से जोड़ता था। कल हो ना हो के लिए प्रीति जिंटा को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला जिसने इस बात पर अंतिम मुहर लगा दी कि करण जौहर का वो रातों रात लिया गया फैसला एकदम सही था।

आज भी जब हम इस फिल्म के सदाबहार गानों या इसके भावुक दृश्यों को देखते हैं तो प्रीति जिंटा का वह मासूम चेहरा और उनकी भावपूर्ण आंखें सीधे हमारे दिल में उतर जाती हैं। यह सोचना भी बड़ा अजीब लगता है कि यह दमदार रोल मूल रूप से उनके लिए लिखा ही नहीं गया था और वे महज एक इत्तेफाक से इस ऐतिहासिक फिल्म का मुख्य हिस्सा बन गई थीं। उनकी दिन रात की मेहनत और लगन ने यह साबित कर दिया कि सही समय पर मिला एक बेहतरीन मौका किसी भी कलाकार को हमेशा के लिए अमर बना सकता है।

समय का मरहम और यश जौहर की बीमारी के दौरान वो भावुक सुलह

जैसे जैसे समय बीतता गया करण और करीना की यह खामोशी और दूरियां उनके खुद के लिए ही एक भारी बोझ बनती जा रही थीं क्योंकि दोनों के बीच एक गहरा और पुराना पारिवारिक रिश्ता था। यह वह मुश्किल समय था जब करण जौहर के पिता यश जौहर को कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी का पता चला और करण अपनी जिंदगी के सबसे निराशाजनक दौर से गुजरने लगे। यह दुखद खबर जैसे ही मीडिया के जरिए बाहर आई तो करीना कपूर खुद को बिल्कुल भी रोक नहीं पाईं और अपनी पुरानी सारी कड़वाहट भूलकर उन्होंने सीधे करण को फोन कर लिया।

अपनी किताब में करण ने उस खास पल का बेहद भावुक और रुला देने वाला वर्णन किया है जब करीना ने फोन पर बात करते हुए जोर जोर से रोना शुरू कर दिया था। करीना ने रुंधे हुए गले से करण से कहा कि उन्हें नहीं पता कि इस समय क्या कहना चाहिए लेकिन वह इस मुश्किल घड़ी में उनके साथ मजबूती से खड़ी हैं और अपने पुराने रवैये के लिए बेहद शर्मिंदा हैं। इस एक भावुक फोन कॉल ने नौ महीने से चली आ रही उस जमी हुई बर्फ को पिघला दिया जिसने दो बेहतरीन और सच्चे दोस्तों को एक दूसरे से मीलों जुदा कर दिया था।

करण जौहर ने भी बिना कोई पुराना सवाल किए करीना को तुरंत माफ कर दिया और जब वे मिले तो दोनों गले लगकर खूब रोए जिससे उनके बीच की सारी गलतफहमियां हमेशा के लिए दूर हो गईं। इस दिल छू लेने वाली घटना ने यह साबित कर दिया कि फिल्म इंडस्ट्री की इस अंधी चकाचौंध और पैसों की अंधी दौड़ के बावजूद इंसानियत और सच्चे रिश्ते हमेशा सबसे ऊपर ही रहते हैं। आज करण और करीना पहले से भी ज्यादा मजबूत दोस्त हैं और कई सफल प्रोजेक्ट्स में एक साथ बेहतरीन काम कर चुके हैं।

एक अधूरी कहानी जो बन गई बॉलीवुड की सबसे खूबसूरत दास्तान

आज जब हम पीछे मुड़कर इस पूरी घटना और इसके परिणामों को देखते हैं तो यह अहसास होता है कि जो कुछ भी होता है वह शायद किसी बहुत अच्छे कारण के लिए ही होता है। अगर करीना कपूर उस दिन अपनी भारी फीस को लेकर अपनी जिद पर अड़ी न रहतीं तो शायद हमें सिनेमाई पर्दे पर नैना के रूप में प्रीति जिंटा का वो अमर अभिनय कभी देखने को ही नहीं मिलता। उसी तरह अगर यह भारी विवाद न होता तो शायद करण और करीना को कभी अपनी गहरी दोस्ती की असली अहमियत और एक दूसरे की कमी का वास्तविक अंदाजा भी नहीं हो पाता।

यह कहानी सिर्फ एक फिल्म के कास्टिंग विवाद या पैसों की तकरार तक सीमित नहीं है बल्कि यह मानव स्वभाव हमारे भीतर के अहंकार और अंततः प्यार और दोस्ती की जीत का एक जीवंत उदाहरण है। बॉलीवुड की इस चकाचौंध भरी दुनिया में जहां हर दिन रिश्ते अक्सर बनते और बिगड़ते रहते हैं वहां इस अनूठी कहानी ने एक स्थायी और अमिट छाप छोड़ी है जो हमेशा याद रखी जाएगी। यह एक ऐसा ऐतिहासिक किस्सा है जो आने वाले कई सालों तक सिनेमा प्रेमियों और फिल्ममेकिंग की बारीकियां सीखने वाले छात्रों के बीच बड़े चाव से सुनाया और समझा जाता रहेगा।

अंत में यह कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा कि कल हो ना हो सिर्फ एक बेहतरीन फिल्म नहीं है बल्कि यह एक गहरी भावना है जिसने पर्दे पर और पर्दे के पीछे दोनों जगह लोगों की जिंदगी को गहरे से छुआ है। इस पूरी दास्तान ने हमें यह भी सिखाया कि करियर में सफलता और असफलता तो समय के साथ आती जाती रहती है लेकिन जो सच्चे रिश्ते हम बनाते हैं असल में वही हमारी सबसे बड़ी कमाई होते हैं। और यही वह सबसे अहम कारण है जिसकी वजह से यह पुरानी कहानी आज भी उतनी ही ताजा और प्रासंगिक लगती है जितनी यह लगभग दो दशक पहले हुआ करती थी।

Sanket Kala

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