मुंबई की उस तपती दोपहर को शायद ही कोई याद रखना चाहेगा जहां एक दुबला पतला सा लड़का हाथ में पेंचकस और तारों का भारी गुच्छा लिए एक बहुत बड़े बंगले के बाहर पसीने में लथपथ खड़ा था उस भव्य बंगले का नाम ‘आशीर्वाद’ था जो उस सुनहरे दौर के सबसे बड़े सुपरस्टार राजेश खन्ना का आशियाना हुआ करता था यह घबराया हुआ युवा लड़का वहां किसी फिल्म के ऑटोग्राफ मांगने या किसी डायरेक्टर से काम मांगने नहीं गया था बल्कि वह वहां एक खराब एयर कंडीशनर को ठीक करने की मामूली सी नौकरी करने गया था
आज जब हम भारतीय सिनेमा के इतिहास के पन्ने पलटते हैं तो यह कहानी सिर्फ एक किस्सा नहीं बल्कि आने वाली कई पीढ़ियों के लिए एक बहुत बड़ा सबक बन जाती है यह कहानी हमें बहुत गहराई से बताती है कि कैसे एक साधारण सा दिखने वाला लड़का अपनी आंखों की खामोशी से पूरी दुनिया को अपना हमेशा के लिए दीवाना बना सकता है इस लेख में हम सिनेमा के सबसे नायाब और अनमोल हीरे इरफान खान के उस पूरे सफर को जीएंगे जहां भयंकर संघर्ष की भट्टी में तपकर एक ऐसे लेजेंड का जन्म हुआ जिसने अभिनय की पूरी परिभाषा ही बदल दी
बचपन के वो दिन जब नवाबों के शहर में मुफलिसी ने अपना पक्का डेरा डाल रखा था
इरफान खान का जन्म राजस्थान के टोंक में एक ऐसे पठान परिवार में हुआ था जिनका ताल्लुक तो पुराने नवाबों से था लेकिन उनके पास रियासत और दौलत के नाम पर कुछ नहीं बचा था उनके पिता टायर का व्यापार करते थे और घर की माली हालत ऐसी थी कि इरफान को बचपन से ही अपनी छोटी छोटी जरूरतों के लिए भी बहुत लंबा संघर्ष करना पड़ा जब इरफान थोड़े बड़े हुए तो अचानक उनके पिता का साया उनके सिर से हमेशा के लिए उठ गया और पूरे परिवार की भारी जिम्मेदारी उनके कच्चे कंधों पर आ गई
पिता के दुखद निधन के बाद उनके पास इतने भी पैसे नहीं बचे थे कि वो अपने पिता का पुराना और खराब पड़ा ट्रैक्टर भी ठीक करवा सकें यही वो मुश्किल वक्त था जब उन्होंने अपनी मां और परिवार की आर्थिक मदद करने के लिए छोटे मोटे काम करना शुरू कर दिया था ताकि घर का खर्च चल सके लेकिन इस सब घोर गरीबी और मुश्किलों के बीच उनके अंदर एक ऐसा बड़ा सपना पल रहा था जिसे वो किसी से कह नहीं पा रहे थे और वो सुनहरा सपना था एक बहुत बड़ा अभिनेता बनने का
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय का वो मासूम झूठ जिसने बदल दी एक साधारण लड़के की किस्मत
दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा यानी एनएसडी में दाखिला लेना उस समय भी किसी आम इंसान के लिए किसी नामुमकिन सपने से बिल्कुल भी कम नहीं था इरफान बहुत अच्छी तरह जानते थे कि एनएसडी में जाने के लिए थिएटर का पुराना अनुभव होना बहुत जरूरी है जो उनके पास उस वक्त बिल्कुल भी नहीं था इसलिए उन्होंने घबराहट में अपने एडमिशन फॉर्म में एक छोटा सा मासूम झूठ लिखा कि उन्हें थिएटर का अनुभव है और किसी तरह उनका दाखिला उस महान संस्थान में हो गया
एनएसडी के वो बिताए हुए दिन इरफान के लिए एक ऐसी पाठशाला बन गए जहां उन्होंने अभिनय की सबसे बारीक चीजों को बहुत करीब से और गहराई से समझा वहां उन्होंने पहली बार सीखा कि अभिनय का मतलब सिर्फ तेज आवाज में डायलॉग बोलना नहीं है बल्कि अपने निभाए जाने वाले किरदार की आत्मा को अपने अंदर पूरी तरह उतार लेना है लेकिन एनएसडी की कड़ी पढ़ाई पूरी करने के बाद जब वो अपने सपनों के शहर मुंबई पहुंचे तो वहां की कड़वी असलियत उनके देखे गए सपनों से बहुत ज्यादा अलग और डरावनी थी
सपनों के शहर मुंबई की वो तपती सड़कें और एक एसी रिपेयरमैन की दास्तान
अस्सी के दशक का वो आखिरी दौर था जब मुंबई ने इस नए और ऊर्जावान कलाकार का स्वागत फूलों से नहीं बल्कि कड़े संघर्ष और घोर निराशा से किया जेब में फूटी कौड़ी नहीं थी और पेट की भयानक भूख शांत करने के लिए सिर्फ एक्टिंग के भरोसे खाली पेट कमरे में नहीं बैठा जा सकता था इसलिए इरफान ने मुंबई की गर्मी में एसी रिपेयर करने का काम शुरू किया ताकि वो अपना गुजारा कर सकें और अपने एक्टिंग के बड़े सपने को भी किसी तरह जिंदा रख सकें
यही वो संघर्ष का दौर था जब उन्हें एक दिन सदी के सबसे बड़े सुपरस्टार राजेश खन्ना के घर का एयर कंडीशनर ठीक करने के लिए भेजा गया जब इरफान उस आलीशान और सपनों जैसे बंगले में दाखिल हुए तो उनकी आंखें उस भारी चकाचौंध और दौलत को देखकर पूरी तरह से फटी की फटी रह गईं उन्होंने दूर से उस सुपरस्टार को देखा जिसे देखकर पूरी दुनिया दीवानी हो जाती थी और तब उस पसीने में भीगे एसी मैकेनिक ने खुद से एक बहुत बड़ा और पक्का वादा किया
इरफान ने उस दिन अपने दिल में मजबूती से ठान लिया था कि एक दिन वो भी इसी सिनेमाई दुनिया का एक बहुत बड़ा और सम्मानित हिस्सा जरूर बनेंगे हालांकि उस वक्त अगर कोई उन्हें उस खराब हालत में देखता तो शायद इस बात पर जोर से हंस पड़ता लेकिन मुकद्दर अपनी एक बहुत बड़ी चाल चल चुका था राजेश खन्ना के घर का वो छोटा सा सफर इरफान के लिए सिर्फ एक दिहाड़ी की नौकरी नहीं थी बल्कि उनके मरते हुए सपनों को मिली एक बहुत बड़ी और जादुई चिंगारी थी
टेलीविजन के उस गहरे भंवर में फंसा एक सिनेमाई सितारा जो उड़ने को बेताब था
मुंबई में शुरुआती कठिन दिनों में जब फिल्मों में कोई भी काम नहीं मिला तो इरफान ने हार मानकर टेलीविजन का रुख किया और वहां उन्हें थोड़ा काम मिलने भी लगा उन्होंने चाणक्य, भारत एक खोज, चंद्रकांता और बनेगी अपनी बात जैसे कई मशहूर और हिट सीरियल्स में बहुत बेहतरीन और यादगार काम किया लेकिन इरफान के अंदर का सच्चा कलाकार सिर्फ एक छोटे से टीवी स्क्रीन तक सीमित नहीं रहना चाहता था क्योंकि उनकी असली मंजिल तो सिल्वर स्क्रीन की दुनिया थी
एक वक्त ऐसा भी आया जब इरफान टीवी के एक ही तरह के नीरस किरदारों से इतने ज्यादा ऊब गए थे कि वो एक्टिंग हमेशा के लिए छोड़ने का मन बना चुके थे उन्हें लगने लगा था कि टीवी के रोजमर्रा के ड्रामे में उनका असली हुनर धीरे धीरे मरता जा रहा है और वो सिर्फ एक पैसे कमाने वाली मशीन बनकर रह गए हैं वो उस जादुई खामोशी की तलाश में दर दर भटक रहे थे जो सिनेमा के बड़े पर्दे पर बिना कुछ कहे भी सीधे दर्शकों के दिलों तक बहुत आसानी से पहुंच जाती है
वो एक ऐतिहासिक फिल्म जिसने रातों रात बदल दी किस्मत और बॉलीवुड को मिला उसका असली जादूगर
इरफान की जिंदगी में असली और सबसे बड़ा बदलाव तब आया जब उन्हें ब्रिटिश निर्देशक आसिफ कपाड़िया की फिल्म ‘द वॉरियर’ में एक मुख्य किरदार निभाने का मौका मिला इस फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इरफान की एक नई और अलग पहचान बनाई लेकिन बॉलीवुड के कड़े बाजार में उनका असली जलवा दिखाना अभी भी बाकी था साल दो हजार तीन में उनके पुराने दोस्त तिग्मांशु धूलिया की फिल्म ‘हासिल’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई और इस फिल्म ने हिंदी सिनेमा के सारे पुराने समीकरण हमेशा के लिए बदल दिए
हासिल में रणविजय सिंह के खूंखार किरदार में इरफान ने एक ऐसे नए विलेन को जन्म दिया जिससे दर्शक नफरत करने की बजाय पागलों की तरह प्यार करने लगे उनके डायलॉग बोलने का वो धीमा लेकिन बेहद असरदार तरीका और उनकी बड़ी बड़ी कातिलाना आंखों का वो खौफ आज भी हर सिनेमा प्रेमी के जेहन में पूरी तरह जिंदा है इसके तुरंत बाद विशाल भारद्वाज की बेहतरीन फिल्म ‘मकबूल’ ने तो जैसे इस बात पर पक्की मुहर लगा दी कि अब बॉलीवुड में एक नए और शानदार युग की शुरुआत हो चुकी है
विवादों से दूर लेकिन भयंकर चुनौतियों से भरा एक एकदम बेदाग और प्रेरणादायक सफर
इरफान का यह लंबा सफर कभी भी आसान नहीं रहा क्योंकि शुरुआत में कई नामी निर्देशकों ने उन्हें यह कहकर रिजेक्ट कर दिया था कि उनका चेहरा किसी मेनस्ट्रीम हीरो जैसा बिल्कुल नहीं है बॉलीवुड में जहां सिक्स पैक एब्स और गोरे रंग को ही सफलता की इकलौती चाबी माना जाता था वहां इरफान ने अपने बेहद साधारण लुक से एक बहुत बड़ी और नई लकीर खींच दी उन्होंने अपनी कला से यह साबित कर दिया कि असली हीरो वो बिल्कुल नहीं होता जिसका शरीर गठीला हो बल्कि वो होता है जिसकी आंखों में समंदर जैसी गहराई और सच्चाई हो
उन्होंने अपने पूरे करियर में कभी भी किसी गुटबाजी का हिस्सा बनने की कोशिश नहीं की और ना ही कभी किसी सस्ते पीआर स्टंट या झूठी खबरों का सहारा लिया उनका शानदार काम ही उनकी सबसे बड़ी पहचान था और उन्होंने अपने दमदार किरदारों के जरिए ही इंडस्ट्री में अपने लिए एक खास और बहुत अलग जगह बनाई चाहे वो पान सिंह तोमर का एक हताश बागी हो या पीकू का एक शांत स्वभाव वाला आम इंसान उन्होंने अपनी एक्टिंग से हर किरदार को सिनेमा के इतिहास में अमर कर दिया
इरफान खान के जीवन और कड़े संघर्ष से जुड़े कुछ अनसुने और बेहद दिलचस्प पहलू
- इरफान खान को अपने बचपन के दिनों से ही पतंग उड़ाने का बहुत भारी शौक था और वो घंटों अपनी छत पर खड़े होकर आसमान में पतंगों के पेंच लड़ाया करते थे
- एनएसडी के मुश्किल दिनों में उनके पास अपने लिए ढंग के कपड़े खरीदने तक के पैसे नहीं होते थे इसलिए वो अक्सर अपने दोस्तों के कपड़े मांगकर पहना करते थे
- जब हासिल फिल्म की शूटिंग चल रही थी तब उनके पास इतने भी पैसे नहीं थे कि वो अपने सफर के लिए एक अच्छी सी पुरानी गाड़ी खरीद सकें
- उन्होंने बहुत बाद में अपने नाम की अंग्रेजी स्पेलिंग में एक अतिरिक्त ‘आर’ इसलिए जोड़ा था क्योंकि उन्हें उस अक्षर की तेज ध्वनि बहुत ज्यादा पसंद आती थी
- हॉलीवुड की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्म जुरासिक वर्ल्ड में काम करना उनके लिए बहुत खास पल था क्योंकि जब जुरासिक पार्क रिलीज हुई थी तब उनके पास सिनेमा हॉल का टिकट खरीदने के पैसे तक नहीं थे
- इरफान ने कभी भी ऑस्कर जीतने वाले महान निर्देशक क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म इंटरस्टेलर को ठुकराने का कोई अफसोस नहीं किया क्योंकि वो उस वक्त अपनी फिल्म द लंचबॉक्स को अपना पूरा समय दे चुके थे
हॉलीवुड के लाल कालीन पर भारत का सबसे खामोश लेकिन सबसे ज्यादा दमदार कदम
बॉलीवुड में अपनी एकछत्र और मजबूत सल्तनत कायम करने के बाद इरफान ने हॉलीवुड की तरफ अपने कदम बढ़ाए और वहां भी अपनी शानदार एक्टिंग का लोहा मनवाया स्लमडॉग मिलियनेयर, लाइफ ऑफ पाई, द अमेजिंग स्पाइडरमैन और जुरासिक वर्ल्ड जैसी बड़ी फिल्मों ने उन्हें रातों रात एक ग्लोबल आइकॉन बना दिया हॉलीवुड के सबसे दिग्गज अभिनेता टॉम हैंक्स ने भी एक बार खुले मंच से कहा था कि इरफान खान की जादुई आंखें दुनिया के किसी भी एक्टर से ज्यादा एक्सप्रेसिव और सच्ची हैं
इरफान खान हॉलीवुड में कोई स्टीरियोटाइप या मजाकिया भारतीय किरदार नहीं निभा रहे थे बल्कि वो वहां के विशाल सिनेमा में अपनी एक बहुत ही मजबूत और सम्मानजनक जगह बना रहे थे उन्होंने पश्चिम के बड़े सिनेमा जगत को यह साफ तौर पर बता दिया कि भारतीय अभिनेता सिर्फ नाच गाना ही नहीं बल्कि बहुत गहरी और संजीदा एक्टिंग भी बखूबी कर सकते हैं उनका यह विशाल अंतरराष्ट्रीय सफर हर उस युवा कलाकार के लिए एक बहुत बड़ी मिसाल है जो दुनिया के नक्शे पर अपनी मेहनत से एक अलग पहचान बनाना चाहता है
एक ऐसी अमर विरासत जिसे विश्व सिनेमा का इतिहास कभी अपनी यादों से मिटा नहीं पाएगा
साल दो हजार अठारह में जब इरफान को अपनी गंभीर और जानलेवा बीमारी न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर के बारे में अचानक पता चला तो जैसे पूरे देश और सिनेमा जगत में एक गहरा सन्नाटा छा गया उन्होंने अपनी इस जानलेवा बीमारी से भी उसी खामोशी और बहादुरी के साथ अंत तक लड़ाई लड़ी जैसे वो अपने किरदारों से पर्दे पर हमेशा पूरी शिद्दत से लड़ते थे अपनी भयंकर बीमारी के दौरान भी उन्होंने अंग्रेजी मीडियम जैसी शानदार और दिल को छू लेने वाली फिल्म की शूटिंग पूरी की जो उनके अभिनय के प्रति उनके सच्चे समर्पण को साफ दिखाती है
29 अप्रैल 2020 को जब इरफान खान ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कहा तो ऐसा लगा जैसे सिनेमा ने अपनी सबसे कीमती और अनमोल चीज हमेशा के लिए खो दी हो लेकिन एक सच्चा और महान कलाकार कभी नहीं मरता वो हमेशा अपनी बेजोड़ कला और अपने करोड़ों चाहने वालों के दिलों में एक सुनहरी याद बनकर जिंदा रहता है इरफान खान सिर्फ एक इंसान का नाम नहीं है बल्कि वो भारतीय सिनेमा की एक ऐसी पवित्र किताब हैं जिसका हर पन्ना आने वाली कई सदियों तक बहुत सम्मान से पढ़ा जाएगा राजेश खन्ना के घर का वो साधारण सा एसी मैकेनिक आज भले ही हमारे बीच नहीं है लेकिन आसमान का सबसे चमकदार सितारा बनकर हमेशा हमारी दुनिया को अपनी कला से रोशन करता रहेगा










