पहली मुलाकात की कड़वाहट जब अजय देवगन ने काजोल से दोबारा न मिलने की कसम खाई थी

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Ajay Devgn Kajol Love Story

हिंदी सिनेमा ने हमेशा हमें पहली नजर के प्यार का एक खूबसूरत सपना बेचा है। हमें अक्सर यही लगता है कि हीरो और हीरोइन की नजरें मिलती हैं, हवा चलने लगती है और बैकग्राउंड में कोई रोमांटिक धुन बजने लगती है| आम दर्शक यही मानते हैं कि असल जिंदगी में भी बॉलीवुड सितारों की प्रेम कहानियां ठीक इसी फिल्मी अंदाज में शुरू होती होंगी|

लेकिन भारत की सबसे मशहूर और सफल जोड़ियों में से एक की असलियत इस फिल्मी मिथक से बिल्कुल अलग है। जब अजय देवगन और काजोल पहली बार मिले थे तो वहां कोई प्यार भरी हवा नहीं चली थी| बल्कि वहां सिर्फ एक गहरी झुंझलाहट और कड़वाहट थी| यह पहली नजर का प्यार नहीं बल्कि पहली नजर की नफरत थी|

यह डीप डाइव आपको साल 1995 में फिल्म ‘हलचल‘ के सेट पर वापस ले जाएगा।आप जानेंगे कि कैसे एक बेहद शांत और गंभीर अजय देवगन का सामना एक बेहद बातूनी और चुलबुली काजोल से हुआ था। यह कहानी इसलिए मायने रखती है क्योंकि यह साबित करती है कि सच्चा प्यार तुरंत मिलने वाली पूर्णता के बारे में नहीं है। यह कहानी बताती है कि कैसे दो बिल्कुल अलग स्वभाव के लोग एक दूसरे की कमियों को स्वीकार करके एक अमर प्रेम कहानी लिख सकते हैं।

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मायानगरी में दो बिल्कुल अलग दुनियाओं का शांतिपूर्ण टकराव

नब्बे का दशक बॉलीवुड के लिए एक सुनहरा दौर था जब बॉक्स ऑफिस पर एक्शन और रोमांस दोनों का जादू सिर चढ़कर बोल रहा था। यह वह समय था जब सोशल मीडिया या पीआर टीमों का कोई वजूद नहीं था और सितारे सेट पर ही अपनी असल जिंदगी जीते थे। इस दौर में अजय देवगन ने ‘फूल और कांटे’ जैसी फिल्मों से एक गंभीर और इंटेंस एक्शन हीरो की छवि बना ली थी|

अजय एक ऐसे अभिनेता थे जो अपनी आंखों से अभिनय करते थे और निजी जिंदगी में बेहद कम बोलते थे। वह एक क्लासिक इंट्रोवर्ट थे जिन्हें शूटिंग के बाद कोने में बैठकर अपनी किताब पढ़ना या शांत रहना पसंद था। दूसरी तरफ काजोल थीं जो एक दिग्गज फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखती थीं और अपनी बेबाक हंसी के लिए जानी जाती थीं।

काजोल की ऊर्जा किसी तूफान की तरह थी जो किसी भी कमरे में प्रवेश करते ही वहां का माहौल बदल देती थीं। वह एक एक्सट्रोवर्ट थीं जिन्हें हर विषय पर बात करना और लोगों के साथ हंसना-मजाक करना पसंद था। इन दोनों की दुनिया इतनी अलग थी कि किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि ये दोनों कभी एक दूसरे के आमने-सामने भी आएंगे| लेकिन नियति ने इन दोनों को एक ही फ्रेम में लाने की एक दिलचस्प पटकथा पहले ही लिख दी थी|

हलचल के सेट पर वो पहली मुलाकात जिसने अजय को दे दिया था सिरदर्द

साल 1995 में अनीस बज्मी फिल्म ‘हलचल’ बना रहे थे। इस फिल्म की लीड एक्ट्रेस पहले दिव्या भारती थीं लेकिन उनके अचानक और दुखद निधन के बाद फिल्म के लिए काजोल को साइन किया गया। फिल्म की शूटिंग शुरू होने वाली थी और अजय सेट पर अपनी उसी पुरानी खामोशी के साथ एक कोने में बैठे हुए थे|

तभी काजोल की सेट पर एंट्री हुई और उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में जोर-जोर से बात करना शुरू कर दिया। काजोल ने सेट पर आते ही जोर से पूछा कि उनका हीरो कहां है और वह इतनी खामोशी से क्यों बैठा है। काजोल की वह तेज आवाज और लगातार बोलने की आदत अजय देवगन को पहली ही मुलाकात में बहुत अजीब और लाउड लगी।

अजय देवगन जो अपनी शांति और एकांत को सबसे ज्यादा महत्व देते थे, उन्हें काजोल का यह रवैया बिल्कुल रास नहीं आया।काजोल का मेकअप रूम में भी लगातार बात करना और हर छोटी बात पर जोर से हंसना अजय के लिए किसी बुरे सपने जैसा था। अजय को उस दिन ऐसा महसूस हुआ जैसे किसी ने उनकी शांत दुनिया में बहुत सारा शोर भर दिया हो।उस पहली मुलाकात ने अजय को लिटरली एक सिरदर्द दे दिया था और वह जल्द से जल्द वहां से जाना चाहते थे।

जब एक इंट्रोवर्ट ने खा ली थी एक एक्सट्रोवर्ट से दूर रहने की कसम

उस दिन की शूटिंग खत्म होने के बाद अजय देवगन इतने ज्यादा परेशान हो गए थे कि उन्होंने एक बहुत बड़ा फैसला ले लिया था।अपने कई पुराने इंटरव्यू में अजय ने खुद इस बात को कबूला है कि हलचल के सेट पर पहले दिन के बाद वह काजोल से दोबारा कभी नहीं मिलना चाहते थे।

अजय ने अपने करीबियों से कह दिया था कि यह लड़की बहुत घमंडी, बातूनी और लाउड है। उन्होंने यहां तक मन बना लिया था कि इस फिल्म के खत्म होने के बाद वह काजोल के साथ भविष्य में कभी कोई काम नहीं करेंगे। एक इंट्रोवर्ट इंसान के लिए काजोल की वह अनियंत्रित ऊर्जा बहुत ज्यादा थी जिसे संभालना अजय के बस की बात नहीं लग रही थी।

काजोल को इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि उनका यह बेबाक अंदाज उनके को-स्टार को इतना ज्यादा परेशान कर रहा है। वह बस वैसी ही थीं जैसी वह हमेशा से रही थीं। लेकिन इस कड़वाहट के बीच भी कैमरे के सामने उनकी केमिस्ट्री बहुत अच्छी निकल कर आ रही थी। पेशेवर होने के नाते दोनों ने अपने काम को प्रभावित नहीं होने दिया और शूटिंग जारी रखी|

नफरत के बादलों के बीच से कैसे निकली दोस्ती की पहली किरण

कहते हैं कि जब आप किसी इंसान के साथ रोज काम करते हैं तो धीरे-धीरे आप उसकी असलियत को समझने लगते हैं।हलचल की शूटिंग जैसे-जैसे आगे बढ़ी, अजय को एहसास हुआ कि काजोल सिर्फ एक बातूनी लड़की नहीं हैं बल्कि वह दिल की बहुत साफ और सच्ची इंसान हैं।

काजोल के मन में जो होता था वही उनकी जुबान पर होता था और बॉलीवुड जैसी जगह पर यह एक बहुत ही दुर्लभ गुण था।अजय जो खुद बनावटीपन से दूर रहते थे, उन्हें काजोल की यह ईमानदारी धीरे-धीरे अच्छी लगने लगी। दोनों के बीच सेट पर चाय पीते हुए छोटी-छोटी बातचीत शुरू हुई जिसने एक मजबूत दोस्ती की नींव रखी।

सबसे दिलचस्प बात यह थी कि उस समय काजोल किसी और को डेट कर रही थीं और वह अपने उस रिश्ते को लेकर अक्सर अजय से सलाह लिया करती थीं। अजय एक अच्छे दोस्त की तरह काजोल की सारी बातें बहुत ही शांति से सुनते थे और उन्हें एक परिपक्व नजरिया देते थे। इसी सलाह मशविरे और बातचीत के दौरान काजोल को भी अजय की गहराई और उनकी समझदारी का असली अंदाजा हुआ।

पर्दे के पीछे की कहानी अजय और काजोल के रिश्ते के अनसुने पहलू

इन दोनों की प्रेम कहानी में कई ऐसे पड़ाव आए जो आम फिल्मी कहानियों से बिल्कुल अलग थे। आइए जानते हैं उनके इस सफर के कुछ सबसे दिलचस्प और छिपे हुए पहलू

  • बिना प्रपोजल वाला प्यार: इन दोनों ने कभी भी एक दूसरे को औपचारिक रूप से आई लव यू नहीं कहा। यह रिश्ता इतनी सहजता से आगे बढ़ा कि किसी को प्रपोज करने की जरूरत ही महसूस नहीं हुई।
  • डेटिंग का अनोखा अंदाज: ये दोनों कभी किसी फैंसी रेस्तरां में कैंडल लाइट डिनर के लिए नहीं गए। इनकी डेटिंग अक्सर कार में एक साथ चुपचाप बैठकर लंबी ड्राइव पर जाने तक सीमित थी।
  • फिल्म इश्क का वो जादुई सफर: साल 1997 में आई फिल्म ‘इश्क’ की शूटिंग के दौरान इन दोनों का रिश्ता एक बहुत ही परिपक्व मोड़ पर पहुंच गया था जहां दोनों एक दूसरे के बिना रह नहीं सकते थे।
  • दो परिवारों का मिलन: अजय का परिवार एक पारंपरिक उत्तर भारतीय परिवार था जबकि काजोल एक बंगाली और महाराष्ट्रीयन संस्कृति से थीं| इसके बावजूद दोनों ने एक दूसरे के परिवार को बहुत प्यार से अपनाया।
  • एक दूसरे का सम्मान: अजय ने कभी काजोल को बदलने की कोशिश नहीं की और काजोल ने अजय की खामोशी का हमेशा सम्मान किया। यही उनके रिश्ते की सबसे बड़ी ताकत बनी।

मीडिया की वो भविष्यवाणियां जिन्हें इस जोड़ी ने कर दिया पूरी तरह गलत

जब अजय और काजोल के रिश्ते की खबरें बॉलीवुड के गलियारों में फैलने लगीं तो मीडिया और फिल्म क्रिटिक्स ने इसे एक बहुत ही बेमेल जोड़ी करार दिया। मैगजीन के कवर पेजों पर यह लिखा जाने लगा कि यह रिश्ता कुछ महीनों से ज्यादा नहीं टिक पाएगा।

लोगों का मानना था कि एक आग है और दूसरा पानी है इसलिए इनका साथ रहना नामुमकिन है। कई फिल्म पंडितों ने तो यहां तक कह दिया था कि काजोल का करियर अजय से शादी करने के बाद पूरी तरह खत्म हो जाएगा। लेकिन इन दोनों ने किसी भी बाहरी टिप्पणी पर ध्यान नहीं दिया।

अजय और काजोल का मानना था कि प्यार सिर्फ एक जैसे लोगों के बीच नहीं होता बल्कि वह उन लोगों के बीच होता है जो एक दूसरे को पूरा करते हैं। जहां अजय की खामोशी को काजोल की हंसी की जरूरत थी, वहीं काजोल की तेज ऊर्जा को अजय की शांति और स्थिरता की दरकार थी। उन्होंने मीडिया की हर भविष्यवाणी को अपनी खामोश लेकिन मजबूत बॉन्डिंग से गलत साबित कर दिया।

बॉलीवुड की सबसे सादगी भरी शादी जो मीडिया की नजरों से दूर रही

चार साल तक एक दूसरे को डेट करने के बाद इस जोड़ी ने साल 1999 में शादी करने का फैसला किया। लेकिन यह शादी किसी भी आम बॉलीवुड शादी जैसी बिल्कुल नहीं थी। अजय देवगन ने एक बहुत ही सख्त शर्त रखी थी कि वह कोई बड़ा और भव्य आयोजन नहीं करेंगे।

अजय को मीडिया की चकाचौंध और भारी भीड़ से हमेशा से परहेज था। इसलिए उन्होंने अपनी शादी को एक बेहद ही निजी समारोह रखने का फैसला किया। यह शादी अजय देवगन के घर की छत पर हुई थी जिसमें सिर्फ परिवार के लोग और कुछ बेहद करीबी दोस्त ही शामिल हुए थे।

शादी के दौरान भी अजय देवगन का एक दिलचस्प किस्सा बहुत मशहूर है। काजोल ने एक इंटरव्यू में बताया था कि फेरों के दौरान अजय इतने ज्यादा बेचैन हो रहे थे कि उन्होंने पंडित जी को जल्दी मंत्र पढ़ने के लिए पैसे तक ऑफर कर दिए थे। अजय बस जल्द से जल्द उस रस्म को पूरा करके अपने कमरे में जाना चाहते थे। यह सादगी ही उनके रिश्ते की सबसे बड़ी पहचान बन गई।

बिना कहे सब कुछ कह जाने वाला एक खूबसूरत और सच्चा सफर

आज जब हम अजय और काजोल को एक साथ देखते हैं तो हमें यह महसूस होता है कि सच्चा प्यार समय के साथ और भी ज्यादा गहरा होता जाता है। इस जोड़ी ने अपनी शादी के दो दशकों से ज्यादा का सफर तय कर लिया है और आज भी वे एक दूसरे के साथ मजबूती से खड़े हैं।

इनका सफर हमें यह सिखाता है कि किसी रिश्ते को सफल बनाने के लिए यह जरूरी नहीं है कि आप दोनों बिल्कुल एक जैसे हों। असली कला तो एक दूसरे के विपरीत स्वभाव का सम्मान करने और उन कमियों के साथ प्यार करने में है। जिस इंसान की शक्ल अजय देवगन दोबारा नहीं देखना चाहते थे, आज वही इंसान उनकी जिंदगी का सबसे अहम और खूबसूरत हिस्सा है।

यह कहानी सिर्फ एक बॉलीवुड गॉसिप नहीं है बल्कि उन सभी लोगों के लिए एक मिसाल है जो प्यार में परफेक्ट मैच की तलाश करते हैं। परफेक्ट मैच बनाए नहीं जाते बल्कि समय, समझ और समर्पण के साथ वे खुद ब खुद परफेक्ट बन जाते हैं। अजय और काजोल की कहानी इस बात का सबसे बड़ा और जीता जागता सबूत है।

Sanket Kala

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