क्या आप बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान की फिल्म ‘तारे ज़मीन पर’ को कभी भुला सकते हैं? शायद नहीं। इस फिल्म ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रचा था, बल्कि इसने भारत में पेरेंटिंग और एजुकेशन सिस्टम को देखने का नजरिया भी बदल दिया था। फिल्म में ‘राम शंकर निकुंभ’ का किरदार निभाकर आमिर खान ने हर किसी को रुला दिया था।
लेकिन क्या हो अगर हम आपसे कहें कि जिस किरदार के लिए आमिर खान की आज भी वाहवाही होती है, वह दरअसल उनका था ही नहीं? जी हां, यह रोल बॉलीवुड के एक और मंझे हुए कलाकार अक्षय खन्ना के लिए लिखा गया था। लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि यह फिल्म अक्षय के हाथ से फिसलकर आमिर की झोली में जा गिरी?
आज हम आपको बॉलीवुड के गलियारों का एक ऐसा किस्सा बताने जा रहे हैं, जिसे सुनकर आपको यकीन हो जाएगा कि इंडस्ट्री में कब किसका पत्ता कट जाए, कोई नहीं जानता।
अमोल गुप्ते की पहली पसंद थे अक्षय खन्ना
यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि ‘तारे ज़मीन पर‘ के राइटर और डायरेक्टर (शुरुआती दौर में) अमोल गुप्ते की नजर में ‘निकुंभ सर’ के रोल के लिए आमिर खान कभी पहली पसंद थे ही नहीं। अमोल गुप्ते ने जब इस संवेदनशील कहानी को लिखा था, तो उनके दिमाग में सिर्फ एक ही चेहरा था और वह था अक्षय खन्ना का।
अक्षय खन्ना अपनी संजीदा एक्टिंग और गहरी आंखों के लिए जाने जाते हैं। अमोल गुप्ते को लगता था कि बच्चों के साथ बॉन्डिंग वाला यह किरदार अक्षय से बेहतर कोई नहीं निभा सकता। उन्होंने मन बना लिया था कि वे यह फिल्म अक्षय खन्ना के साथ ही बनाएंगे।
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वो मुलाकात जिसने बदल दिया इतिहास
कहानी में ट्विस्ट तब आया जब अमोल गुप्ते ने अक्षय खन्ना तक पहुंचने की कोशिश की। चूंकि अमोल गुप्ते उस समय आमिर खान को जानते थे, इसलिए उन्होंने सोचा कि आमिर के जरिए अक्षय खन्ना से मीटिंग फिक्स करना आसान होगा।
अमोल गुप्ते, आमिर खान के पास पहुंचे। उनका मकसद साफ था – वे चाहते थे कि आमिर उनकी सिफारिश अक्षय खन्ना से कर दें या फिर अक्षय से उनकी मुलाकात करवा दें ताकि वे उन्हें ‘तारे ज़मीन पर’ की स्क्रिप्ट सुना सकें।
लेकिन यहां आमिर खान ने अपना ‘मास्टरस्ट्रोक’ चल दिया। आमिर ने अमोल गुप्ते से कहा कि वह अक्षय से बात करने से पहले खुद स्क्रिप्ट सुनना चाहेंगे। आमिर यह जानना चाहते थे कि आखिर वह कौन सी कहानी है जिसे अमोल, अक्षय को सुनाना चाहते हैं।
जब स्क्रिप्ट सुनकर आमिर ने बदल दिया इरादा
आमिर खान के घर पर स्क्रिप्ट नरेशन शुरू हुआ। जैसे-जैसे अमोल गुप्ते कहानी सुनाते गए, आमिर खान उसमें खोते चले गए। फिल्म का इमोशनल कनेक्ट और ‘डिस्लेक्सिया’ जैसे गंभीर मुद्दे को उठाने का तरीका आमिर को इतना पसंद आया कि उन्होंने वहीं फैसला ले लिया।
आमिर खान को यह कहानी इतनी दमदार लगी कि उन्होंने अक्षय खन्ना का नाम बीच से हटा दिया। रिपोर्ट्स और खुद अक्षय खन्ना के बयानों के मुताबिक, आमिर ने तय कर लिया कि ‘राम शंकर निकुंभ’ का रोल वह खुद करेंगे।
नतीजा यह हुआ कि वह स्क्रिप्ट कभी अक्षय खन्ना तक पहुंची ही नहीं। जिस रोल के लिए अमोल गुप्ते, अक्षय के पास जाना चाहते थे, उसे आमिर खान ने ‘हाईजैक’ कर लिया।
अक्षय खन्ना का चौंकाने वाला रिएक्शन
सालों बाद, एक इंटरव्यू के दौरान अक्षय खन्ना ने इस पूरे वाकये पर अपनी चुप्पी तोड़ी थी। आम तौर पर जब किसी एक्टर से इतनी बड़ी फिल्म छिन जाती है, तो मन में कड़वाहट आ जाती है। लेकिन अक्षय खन्ना ने जिस शालीनता से इस पर बात की, उसने सबका दिल जीत लिया।
अक्षय ने इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा था कि अमोल गुप्ते उन्हें ही वह रोल देना चाहते थे। लेकिन जब आमिर ने स्क्रिप्ट सुनी, तो वह उन्हें इतनी पसंद आ गई कि उन्होंने खुद इसे करने का फैसला कर लिया।
अक्षय ने मुस्कुराते हुए कहा था, “Aamir being Aamir, he liked it so much that he did it.” (आमिर तो आमिर हैं, उन्हें यह इतनी पसंद आई कि उन्होंने खुद कर ली)।
अक्षय खन्ना ने यह भी माना कि उन्हें इस बात का कोई मलाल नहीं है। उनका कहना था कि आमिर ने उस किरदार के साथ पूरा न्याय किया। शायद अगर अक्षय वह रोल करते, तो वह अलग होता, लेकिन आमिर ने उसे जिस तरह निभाया, वह बेहतरीन था।
किस्मत का खेल या होशियारी?
बॉलीवुड में इसे आप किस्मत का खेल कह सकते हैं या फिर आमिर खान की होशियारी। आमिर खान की यह खासियत है कि उन्हें अच्छी स्क्रिप्ट की परख है। जब उन्हें लगता है कि कोई कहानी सोना उगल सकती है, तो वे उसे हाथ से जाने नहीं देते।
‘तारे ज़मीन पर’ न केवल एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई, बल्कि इसने दर्शील सफारी को स्टार बना दिया और आमिर खान की साख को एक डायरेक्टर और एक्टर के तौर पर और मजबूत किया।
लेकिन यह सवाल हमेशा बना रहेगा कि अगर अक्षय खन्ना उस आर्ट टीचर के रोल में होते, तो फिल्म कैसी होती? क्या उसमें वही जादू होता जो आमिर लेकर आए थे? या फिर अक्षय अपनी खामोश अदाकारी से इसे एक अलग ही लेवल पर ले जाते?
निष्कर्ष
यह किस्सा साबित करता है कि फिल्म इंडस्ट्री में टैलेंट के साथ-साथ सही समय पर सही जगह होना कितना जरूरी है। अक्षय खन्ना के लिए लिखी गई फिल्म, आमिर खान की लैंडमार्क फिल्म बन गई। इसे ही शायद मुकद्दर का सिकंदर होना कहते हैं।
वैसे, आपको क्या लगता है? क्या अक्षय खन्ना ‘निकुंभ सर’ के रोल में आमिर खान से बेहतर लग सकते थे? यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब अब सिर्फ कल्पना में ही दिया जा सकता है।







