क्या संगीत की दुनिया के सबसे शांत सितारे और बॉलीवुड की सबसे बेबाक आवाज के बीच अब एक नई जंग छिड़ गई है? यह सवाल आज हर सिने प्रेमी के मन में है।
बॉलीवुड में अक्सर विवाद होते रहते हैं, लेकिन जब विवाद में ऑस्कर विजेता ए.आर. रहमान जैसा नाम घसीटा जाए, तो मामला सिर्फ गॉसिप नहीं रह जाता। कंगना रनौत, जो अपनी बेबाकी और निडर बयानों के लिए जानी जाती हैं, ने अब सीधे तौर पर संगीत के उस्ताद ए.आर. रहमान पर एक ऐसा आरोप लगाया है जिसने पूरी इंडस्ट्री को सन्न कर दिया है। यह सिर्फ काम न मिलने का शिकवा नहीं है, बल्कि यह एक वैचारिक युद्ध है जो अब सोशल मीडिया के गलियारों से निकलकर सीधे खबरों की हेडलाइन्स बन गया है।
‘इमरजेंसी’ के लिए दरवाजे बंद?
कंगना रनौत ने अपनी हालिया निर्देशित फिल्म ‘इमरजेंसी’ को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। एक्ट्रेस ने दावा किया है कि वह अपनी इस फिल्म के संगीत के लिए ए.आर. रहमान के पास जाना चाहती थीं। वह उन्हें फिल्म की कहानी सुनाना चाहती थीं, लेकिन रहमान ने कथित तौर पर उनसे मिलने तक से इनकार कर दिया। कंगना के अनुसार, रहमान ने उनसे दूरी इसलिए बनाई क्योंकि उन्हें लगा कि ‘इमरजेंसी’ एक “प्रोपेगेंडा फिल्म” है।
यह आरोप बेहद गंभीर है क्योंकि ए.आर. रहमान को हमेशा विवादों से दूर रहने वाला और सिर्फ अपने काम से काम रखने वाला कलाकार माना जाता है। लेकिन कंगना का कहना है कि रहमान ने बिना फिल्म देखे और बिना कहानी सुने ही यह धारणा बना ली।
कंगना का सीधा हमला: ‘आपसे ज्यादा नफरत करने वाला नहीं देखा’
कंगना ने अपने इंस्टाग्राम पर एक लंबा नोट साझा करते हुए रहमान पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने लिखा कि इंडस्ट्री में उन्हें अक्सर भेदभाव का सामना करना पड़ता है क्योंकि वह एक विशेष राजनीतिक विचारधारा (भगवा पार्टी) का समर्थन करती हैं। लेकिन उन्होंने रहमान को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में रहमान से ज्यादा “पक्षपाती और नफरत से भरा” इंसान नहीं देखा।
कंगना ने अपने पोस्ट में लिखा, “डियर ए.आर. रहमान जी, मैं फिल्म इंडस्ट्री में बहुत पक्षपात और भेदभाव झेलती हूं… लेकिन मुझे कहना पड़ेगा कि मैंने आपसे ज्यादा नफरत करने वाला इंसान नहीं देखा। मैं आपको अपनी फिल्म इमरजेंसी की कहानी सुनाना चाहती थी, लेकिन कहानी सुनना तो दूर, आपने मिलने से भी मना कर दिया।”
कंगना यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने आगे लिखा कि जिस फिल्म को रहमान ने प्रोपेगेंडा बताकर खारिज कर दिया, उसी फिल्म को बाद में क्रिटिक्स ने मास्टरपीस कहा और यहां तक कि विपक्षी नेताओं ने भी फिल्म के संतुलित दृष्टिकोण की तारीफ की। कंगना ने तंज कसते हुए कहा, “विडंबना देखिये… लेकिन आप अपनी नफरत में अंधे हो चुके हैं। मुझे आपके लिए दया आती है।”
रहमान का बयान और विवाद की जड़
इस पूरे विवाद की टाइमिंग बेहद दिलचस्प है। यह हमला तब हुआ है जब ए.आर. रहमान ने हाल ही में बीबीसी (BBC) को दिए एक इंटरव्यू में बॉलीवुड के बदलते माहौल पर टिप्पणी की थी। रहमान ने कहा था कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अब उनके लिए काम कम हो गया है और इसके पीछे की वजह “गैंग्स” और “नॉन-क्रिएटिव लोगों” का पावर में आना है। रहमान ने यह भी इशारा किया था कि शायद इंडस्ट्री “कम्युनल” (सांप्रदायिक) होती जा रही है।
इसके साथ ही, रहमान ने विक्की कौशल की फिल्म ‘छावा’ (Chhaava) को “विभाजनकारी” (Divisive) बताया था। रहमान का यह बयान सोशल मीडिया पर आग की तरह फ़ैल गया। कंगना रनौत ने इसी बयान को आधार बनाते हुए उन पर निशाना साधा है। कंगना का तर्क यह है कि जो व्यक्ति खुद को इंडस्ट्री के भेदभाव का शिकार बता रहा है, वही व्यक्ति उनकी फिल्म के साथ भेदभाव कर रहा था।
राजनीतिक रंग लेता विवाद
यह मामला अब सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसमें राजनीति भी कूद पड़ी है। एक तरफ जहां कंगना रनौत खुलकर अपनी विचारधारा की बात कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ ए.आर. रहमान के बयानों को राजनीतिक हलकों में अलग-अलग नजरिये से देखा जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिहार के किशनगंज से कांग्रेस विधायक कमरुल हुदा ने ए.आर. रहमान के समर्थन में बयान दिया है। उन्होंने रहमान के उस दर्द का समर्थन किया है जिसमें उन्होंने भेदभाव की बात कही थी।
यह स्पष्ट है कि यह लड़ाई अब ‘कला’ से ज्यादा ‘विचारधारा’ की हो गई है। एक तरफ ‘राष्ट्रवाद’ का नैरेटिव है तो दूसरी तरफ ‘सेक्युलरिज्म’ और ‘भेदभाव’ की बहस।
इमरजेंसी: फिल्म जो रिलीज से पहले ही इतिहास बन गई
कंगना की फिल्म ‘इमरजेंसी’ शुरू से ही विवादों में रही है। कभी सेंसर बोर्ड का सर्टिफिकेट अटकना, कभी सिखों की नाराजगी, और अब ए.आर. रहमान का कथित इनकार। कंगना का कहना है कि उन्होंने देश के सबसे काले दौर को ईमानदारी से दिखाने की कोशिश की है, लेकिन इंडस्ट्री के कुछ दिग्गज इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।
कंगना का यह दावा कि रहमान ने इसे “प्रोपेगेंडा” कहा, यह सवाल खड़ा करता है कि क्या बॉलीवुड में अब फिल्में स्क्रिप्ट से पहले ‘राजनीतिक चश्मे’ से देखी जा रही हैं? अगर कंगना का दावा सच है, तो यह दर्शाता है कि इंडस्ट्री के भीतर की खटास किस हद तक बढ़ चुकी है।
सन्नाटा या तूफान?
फिलहाल ए.आर. रहमान की तरफ से कंगना के इस specific आरोप पर कोई जवाब नहीं आया है। रहमान अपनी सूफी शांत शैली के लिए जाने जाते हैं, और वे अक्सर ऐसे विवादों पर चुप्पी साधना ही बेहतर समझते हैं। लेकिन कंगना ने जो ‘क्यूरियोसिटी गैप’ बनाया है, उसने फैंस को दो हिस्सों में बांट दिया है।
क्या रहमान सच में ‘इमरजेंसी’ से जुड़े किसी भी विवाद से बचना चाहते थे, इसलिए उन्होंने दूरी बनाई? या फिर जैसा कंगना कह रही हैं, यह वाकई एक वैचारिक नफरत थी? वजह जो भी हो, इस खुलासे ने यह साबित कर दिया है कि बॉलीवुड में सब कुछ ‘हंकी-डोरी’ नहीं है। पर्दों के पीछे की कहानियां फिल्मों से ज्यादा नाटकीय और मसालेदार हो चुकी हैं। अब देखना यह होगा कि क्या रहमान अपनी चुप्पी तोड़ते हैं या कंगना का यह वार एकतरफा ही रह जाएगा।






